जबलपुर | बरगी बांध हादसे के चौथे दिन आज रविवार का सूरज एक बेहद गमगीन खबर लेकर आया। पिछले कई दिनों से जारी व्यापक सर्च ऑपरेशन के दौरान आज सुबह रेस्क्यू टीम ने जलमग्न गहराईयों से चाचा और भतीजे के पार्थिव शरीर बरामद किए हैं। 9 वर्षीय मासूम मयूरन और उसके चाचा कामराज का शव मिलने के बाद मौके पर मौजूद परिजनों और बचाव दल की आंखें नम हो गईं। इस हृदयविदारक घटना में अब तक कुल 13 शवों की बरामदगी हो चुकी है, जिसने पूरे जिले को शोक में डुबो दिया है।
एक ही परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: बिखर गए सपने
यह हादसा महज एक जल त्रासदी नहीं, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार की बर्बादी की दास्तां बन गया है। कुदरत ने इस परिवार को ऐसे जख्म दिए हैं, जिसकी टीस ताउम्र बनी रहेगी।
- चाचा-भतीजे की दर्दनाक विदाई: रविवार की सुबह गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद पहले बालक मयूरन और फिर उसके चाचा कामराज का शव बाहर निकाला। चाचा और भतीजे का इस तरह एक साथ दुनिया छोड़ जाना रूह कंपा देने वाला है।
- मां का अंतिम सफर: इस दुखद कड़ी में मयूरन की मां कुकलाझी का शव कल ही बरामद किया गया था। प्रशासनिक संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके पार्थिव देह को जेट विमान के माध्यम से तमिलनाडु उनके पैतृक स्थान भेज दिया गया है।
सर्च ऑपरेशन का चौथा दिन: 13 जिंदगियों की जल समाधि
बरगी बांध के अथाह पानी में लापता लोगों की तलाश के लिए सेना के विशेषज्ञ गोताखोर, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें पिछले 72 घंटों से संघर्ष कर रही थीं। आज इन दो महत्वपूर्ण शवों की बरामदगी के बाद अब तक 13 लोगों के मरने की पुष्टि हुई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर करीब 200 बचावकर्मी इस मिशन में तैनात रहे, जिन्होंने विषम परिस्थितियों के बावजूद शवों को खोजने में सफलता पाई।
जलाशय किनारे पसरा सन्नाटा
बरगी की शांत दिखती लहरें आज उस तबाही की गवाह हैं, जिसने कई घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझा दिए। जहां एक ओर चाचा-
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