जबलपुर | प्रथम टुडे (सच की बात सबके साथ) नर्मदा खंड के सुप्रसिद्ध सिद्ध संत दादा ठन ठन पाल महाराज का चैत्र शुक्ल एकादशी निर्वाण दिवस 'आनंद महोत्सव' के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। शास्त्री ब्रिज स्थित नरसिंह मंदिर में आयोजित इस गरिमामय समारोह का संचालन जगद्गुरु डॉ. स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज के सानिध्य में हुआ।
विभूतियों को मिली संकीर्तनाचार्य की उपाधि
इस अवसर पर जमुना प्रसाद अग्रवाल एडवोकेट ट्रस्ट द्वारा संकीर्तन के क्षेत्र में समर्पित सेवा देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। सुरेंद्र गिरी गोस्वामी एवं सुरेश विश्वकर्मा को 'संकीर्तनाचार्य' की उपाधि से अलंकृत किया गया। वहीं, श्याम मनोहर पटेल को 'सह संकीर्तनाचार्य' की उपाधि प्रदान की गई। सभी विभूतियों का सम्मान शाल, श्रीफल एवं पुष्पमाला भेंट कर किया गया।
'दूसरों का दुख हर लेते थे दादाजी'
समारोह को संबोधित करते हुए जगद्गुरु नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि दादा ठन ठन पाल जी एक ऐसे दिव्य संत थे जो दूसरों का कष्ट स्वयं ले लेते थे। उनके मुख से निकले शब्द स्वयं सिद्ध होते थे। उन्होंने बताया कि आज भी जबलपुर में ऐसे अनगिनत उदाहरण मौजूद हैं जहाँ लोगों की मनोकामनाएं दादा जी के आशीर्वाद से पूर्ण हुई हैं। विशेषकर गांव-गांव में 'सीताराम संकीर्तन' के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना जगाने में उनका अतुलनीय योगदान रहा है।
आयोजन में गणमान्य जनों की उपस्थिति
महोत्सव के दौरान नर्मदा महा आरती के संस्थापक डॉ. सुधीर अग्रवाल, सुषमा शंकर पटेल, डॉ. शंकर पांडे, समर सिंह, दुर्गा कूर्मि, बंटी पटेल, करण पटेल, विनोद दीवान, मनोज गुलाब बनी, उमेश विश्वकर्मा, विनोद विश्वकर्मा, छन्नू राम पटेल एवं अशोक विश्वकर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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