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Tuesday, April 21, 2026

हाईकोर्ट में पेश हुए विधायक संजय पाठक, बिना पढ़े हलफनामा बताने पर वकील को फटकार

 जबलपुर | प्रथम टुडे

मंगलवार 21 अप्रैल को भाजपा विधायक संजय पाठक जबलपुर हाईकोर्ट में पेश हुए। यह मामला इन दिनों खासा चर्चा में है, क्योंकि उनके खिलाफ क्रिमिनल कंटेंप्ट से जुड़ी कार्यवाही चल रही है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई अहम टिप्पणियां करते हुए स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मामले में केवल तय दायरे में ही आगे बढ़ा जाएगा।

संजय पाठक से जुड़े कंटेंप्ट मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि आयुक्त मनु दीक्षित को सीमित दायरे में अदालत की सहायता करने की छूट दी गई है।

बिना हलफनामा पढ़े उसे "फर्जी" बताने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए याचिकाकर्ता पक्ष के वकील को कड़ी फटकार लगाई।



मंगलवार 21 अप्रैल को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच में इस हाई-प्रोफाइल कंटेंप्ट मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट के पिछले आदेश के अनुसार भाजपा विधायक संजय पाठक स्वयं अदालत में उपस्थित रहे।

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तय दायरे में ही आगे बढ़ाया जाएगा और अनावश्यक विवाद या आरोप-प्रत्यारोप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला, लेकिन हस्तक्षेप खारिज

आयुक्त मनु दीक्षित की ओर से अधिवक्ता देवदत्त कामत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए इंटरवेंशन एप्लीकेशन स्वीकार करने की मांग की।

हालांकि हाईकोर्ट ने आदेश का परीक्षण करते हुए स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल अदालत की सहायता करने की स्वतंत्रता दी थी, हस्तक्षेप का अधिकार नहीं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप की मांग को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।

हलफनामे पर आरोप लगाने पर कोर्ट की नाराजगी

सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से संजय पाठक के हलफनामे को “फर्जी” बताया गया, तो चीफ जस्टिस की बेंच ने कड़ी नाराजगी जताई।

कोर्ट ने अधिवक्ता से पूछा कि क्या उन्होंने स्वयं हलफनामा पढ़ा है। यदि नहीं, तो बिना आधार के इस प्रकार के आरोप कैसे लगाए जा सकते हैं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की “हवा-हवाई” दलीलें स्वीकार नहीं की जाएंगी।

"कंटेंप्ट को दुश्मनी का मंच नहीं बनने देंगे"

हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कंटेंप्ट की कार्यवाही को किसी भी हालत में व्यक्तिगत या राजनीतिक दुश्मनी का मंच नहीं बनने दिया जाएगा। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायिक मर्यादा और प्रक्रिया सर्वोपरि रहेगी।

अगली तारीख तय, सख्ती जारी

संजय पाठक की ओर से अगली सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने की मांग की गई, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 मई 2026 को होगी, जिसमें संजय पाठक को फिर से हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना अनिवार्य होगा।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला उस समय शुरू हुआ जब माइनिंग से जुड़े एक केस की सुनवाई के दौरान आरोप लगा कि विधायक संजय पाठक ने संबंधित जज को फोन कर मामले पर चर्चा करने की कोशिश की।

जस्टिस विशाल मिश्रा ने इस घटनाक्रम को ऑर्डर शीट में दर्ज करते हुए स्वयं को मामले से अलग कर लिया और प्रकरण को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया।

इसके बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए संजय पाठक के खिलाफ क्रिमिनल कंटेंप्ट की कार्यवाही शुरू की, जो अब लगातार सुनवाई में जारी है।

प्रथम टुडे

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