प्रथम टुडे | सच की बात सबके साथ | जबलपुर
जिले में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी का असर अब स्कूली बच्चों पर साफ दिखाई देने लगा है। जहां एक ओर प्रदेश के कई जिलों में तापमान 39 डिग्री सेल्सियस पहुंचते ही प्राथमिक से पांचवीं तक के बच्चों के लिए छुट्टी घोषित कर दी गई है, वहीं जबलपुर में जिला प्रशासन अब तक इस ओर कोई ठोस कदम उठाता नजर नहीं आ रहा है।
स्कूलों में बच्चों की तबीयत बिगड़ने की खबर
भीषण गर्मी के कारण कई स्कूलों में बच्चों की तबीयत बिगड़ने की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ स्थानों पर बच्चों के नाक से खून निकलने की बात सामने आई है, वहीं कई बच्चों को दस्त, उल्टी और चक्कर आने की समस्या भी हो रही है। अभिभावकों का कहना है कि तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच छोटे बच्चों को स्कूल भेजना उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता जा रहा है।
फूलों में नहीं है पर्याप्त सुविधाएं
शहर के कई शासकीय एवं निजी स्कूलों में पर्याप्त व्यवस्थाएं भी नहीं हैं। कई स्कूलों में कक्षाओं में कूलर या पर्याप्त पंखों की व्यवस्था नहीं है, जबकि कुछ जगह बच्चों को गर्म हवा के थपेड़ों के बीच पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे बच्चों की परेशानी और बढ़ गई है।
अभिभावक कर चुके हैं स्कूल प्रबंधन से शिकायत
अभिभावकों ने इस संबंध में कई बार स्कूल प्रबंधन से शिकायत भी की है, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि जब अन्य जिलों में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए छुट्टियां घोषित की जा रही हैं, तो जबलपुर में भी प्रशासन को जल्द निर्णय लेना चाहिए।
शिक्षकों को विभिन्न गतिविधियों को लेकर किया जा रहा परेशान
भीषण गर्मी का असर शिक्षकों पर भी पड़ रहा है। कई स्कूलों में छुट्टी होने के बाद भी शिक्षकों को विभिन्न गतिविधियों के नाम पर रोका जा रहा है। कहीं "आइसक्रीम डे" तो कहीं "कूल डे" जैसी गतिविधियों की तैयारी कराई जा रही है, जबकि कई स्कूलों में ठंडक की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है। इससे शिक्षकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आने वाले दिनों में भीषण गर्मी के सकेत
इधर मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और अधिक गर्मी पड़ने की चेतावनी दी है। तापमान में और वृद्धि होने की संभावना जताई गई है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर और असर पड़ सकता है।
अभिभावकों और शिक्षकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए अवकाश घोषित किया जाए या स्कूल का समय परिवर्तित किया जाए, ताकि भीषण गर्मी से बच्चों को राहत मिल सके।
यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में बच्चों की परेशानी और बढ़ सकती है।

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