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Monday, March 16, 2026

वैश्विक संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा: जमीन के नीचे सुरक्षित है करोड़ों बैरल कच्चा तेल

 


प्रथम टुडे 

दुनिया में चल रहे युद्ध, समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बन रही अनिश्चित परिस्थितियों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर वर्षों पहले ही ठोस और दूरदर्शी कदम उठा लिए थे। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल के बावजूद भारत की पेट्रोलियम आपूर्ति व्यवस्था अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जा रही है।

भारत सरकार ने संभावित संकट से निपटने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve – SPR) की व्यवस्था विकसित की है। इसके तहत देश में जमीन के नीचे विशाल चट्टानी गुफाओं में कच्चे तेल का भंडार सुरक्षित रखा गया है, ताकि किसी आपात स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके।

आखिर भारत को इस योजना पर काम करने की जरूरत कब पड़ी बताया जाता है 1992 में जब खाड़ी युद्ध हो रहा था तबभरत के 6 दिन का तेल बचा और डॉलर खत्म हो चुके थे। उसके बाद भारत में और देश के समान अपने यहां भी तेल को रिजर्व जैसे वैश्विक संकट के समय इस्तेमाल कर सके इसके लिए योजना बनाना शुरू की जिसके लिए जरूरी था ऐसा स्थान जहां पर तेल को जमीन के अंदर सुरक्षित रखा जा सके। जहां भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के साथ ही सुरक्षा दृष्टि भी महत्वपूर्ण रखी गई जिसके लिए दक्षिण भारत सबसे उपयुक्त स्थान लगा 

इस पूरे प्रबंधन का संचालन केंद्र सरकार की विशेष कंपनी

Indian Strategic Petroleum Reserves Limited (आईएसपीआरएल) करती है, जो कि Oil Industry Development Board के अधीन कार्यरत एक सरकारी संस्था है। इस कंपनी की स्थापना विशेष रूप से भारत के रणनीतिक तेल भंडार को तैयार करने और संचालित करने के उद्देश्य से की गई थी।

जमीन के नीचे बने हैं विशाल तेल भंडार

भारत में वर्तमान में तीन प्रमुख स्थानों पर रणनीतिक तेल भंडार स्थापित किए गए हैं—

विशाखापट्टनम – 1.33 मिलियन मीट्रिक टन

मंगलुरु – 1.5 मिलियन मीट्रिक टन

पडूर – 2.5 मिलियन मीट्रिक टन

इन स्थानों पर जमीन के नीचे चट्टानों को काटकर बड़ी-बड़ी गुफाएं बनाई गई हैं, जिनमें कुल मिलाकर लगभग 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (करीब 39 मिलियन बैरल) कच्चा तेल सुरक्षित रखा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह भंडार आपातकालीन स्थिति में भारत की लगभग 9 से 10 दिनों की कुल तेल खपत को पूरा करने में सक्षम है।

रिफाइनरियों के पास भी है अलग भंडार

रणनीतिक भंडार के अलावा भारत की सरकारी और निजी तेल रिफाइनरियों के पास भी कच्चे तेल का व्यावसायिक स्टॉक मौजूद रहता है। इन भंडारों को जोड़ दिया जाए तो देश के पास कुल मिलाकर करीब 7 से 8 सप्ताह की तेल सुरक्षा उपलब्ध रहती है।

यानी यदि अंतरराष्ट्रीय सप्लाई अचानक प्रभावित भी हो जाए तो भारत के पास तत्काल संकट से निपटने की पर्याप्त क्षमता मौजूद है।

2005 में शुरू हुई थी दूरदर्शी योजना

भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को वर्ष 2005-06 के आसपास मंजूरी दी थी। इसके बाद पहले चरण में तीनों स्थानों पर रणनीतिक भंडार तैयार किए गए, जो 2015 से 2018 के बीच पूरी तरह संचालित होने लगे।

आज जब दुनिया के कई देश तेल आपूर्ति को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं, तब भारत की यह पहल उसकी दूरदर्शी नीति का उदाहरण बनकर सामने आ रही है।

अब केवल मध्य पूर्व पर निर्भर नहीं भारत

भारत ने तेल आयात के स्रोतों को भी व्यापक रूप से विविध बनाया है। पहले भारत की बड़ी निर्भरता मध्य पूर्व के देशों पर थी और खासकर

Strait of Hormuz से गुजरने वाले समुद्री मार्ग से तेल की बड़ी मात्रा आती थी।

लेकिन अब भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जिसमें अमेरिका, रूस, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई देश शामिल हैं। इससे किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर भी तेल आपूर्ति पूरी तरह बाधित नहीं होती।

नए भंडार बनाने की तैयारी

भारत सरकार रणनीतिक भंडारण क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है। दूसरे चरण के तहत नए तेल भंडार बनाने की योजना बनाई गई है, जिनमें प्रमुख स्थान हैं—

चांदीखोल

बीकानेर

इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारत की कुल रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता लगभग 11.8 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

संकट की स्थिति में आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता

सरकार ने आपातकालीन स्थिति में ईंधन वितरण की भी स्पष्ट प्राथमिकता तय की है। यदि कभी बड़ा संकट पैदा होता है तो सबसे पहले—

सेना

अस्पताल

पुलिस

बिजली उत्पादन

सार्वजनिक परिवहन

जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।

ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में मजबूत कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के दौर में भारत की यह रणनीति बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। रणनीतिक तेल भंडार, आयात के विविध स्रोत और वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग मिलकर देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं।

स्पष्ट है कि आने वाले समय की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में समय रहते दूरदर्शी और मजबूत कदम उठाए हैं।

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