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Friday, February 27, 2026

मेडिकल यूनिवर्सिटी से जुड़े 9 नर्सिंग कॉलेजों की लापरवाही, 206 छात्रों का रिजल्ट अटका

 

प्रथम टुडे 

जबलपुर। मध्य प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी से संबद्ध 9 नर्सिंग कॉलेजों की प्रशासनिक लापरवाही के चलते करीब 206 छात्र-छात्राओं का परिणाम अटक गया है। वजह यह है कि संबंधित कॉलेजों ने समय-सीमा के भीतर प्रैक्टिकल परीक्षा के अंक विश्वविद्यालय के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड नहीं किए।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे छात्रों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ मानते हुए संबंधित संस्थानों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब तलब किया है।

प्रैक्टिकल अंक अपलोड न होने से फंसा रिजल्ट

अगस्त 2025 में आयोजित बी.एससी. नर्सिंग द्वितीय वर्ष की परीक्षा में प्रदेशभर से 11,948 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। विश्वविद्यालय ने हाल ही में परीक्षा परिणाम घोषित कर अधिकांश छात्रों की मार्कशीट जारी कर दी है।

हालांकि 9 कॉलेजों द्वारा प्रैक्टिकल के अंक अपलोड न किए जाने के कारण 206 छात्रों का परिणाम रोकना पड़ा। विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, प्रैक्टिकल अंक के बिना अंतिम परिणाम तैयार करना संभव नहीं था, जिसके चलते इन छात्रों की मार्कशीट जारी नहीं की जा सकी।

इस देरी से प्रभावित छात्र अब उच्च कक्षाओं में प्रवेश, छात्रवृत्ति आवेदन और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।

 तीन माह की समय-सीमा के बावजूद चूक

विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार, थ्योरी परीक्षा के बाद कॉलेजों को लगभग तीन महीने का समय दिया जाता है ताकि वे प्रैक्टिकल परीक्षाएं आयोजित कर उनके अंक पोर्टल पर दर्ज कर सकें।

प्रशासन का कहना है कि पर्याप्त समय और तकनीकी सहायता उपलब्ध होने के बावजूद संबंधित कॉलेजों ने निर्धारित अवधि में अंक अपलोड नहीं किए। इसे विश्वविद्यालय ने गंभीर प्रशासनिक चूक करार दिया है।

अधिकारियों का मानना है कि ऐसी लापरवाही न केवल छात्रों के करियर को प्रभावित करती है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थान की साख पर भी प्रतिकूल असर डालती है।

दोषी संस्थानों पर कार्रवाई की तैयारी

विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. आदित्य ठाकुर ने बताया कि प्रभावित छात्रों का परिणाम शीघ्र जारी करने के लिए वैकल्पिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही सभी संबंधित कॉलेजों को नोटिस भेजकर स्पष्ट जवाब मांगा गया है।

यदि संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो मामले को विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद/बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन अब भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और सख्त बनाने पर विचार कर रहा है, जिसमें समय-सीमा की डिजिटल ट्रैकिंग और देरी पर दंडात्मक प्रावधान शामिल हो सकते हैं।

 छात्रों की मांग – समयबद्ध समाधान

प्रभावित छात्रों और अभिभावकों ने विश्वविद्यालय से मांग की है कि परिणाम शीघ्र घोषित कर शैक्षणिक सत्र प्रभावित न होने दिया जाए। उनका कहना है कि गलती संस्थानों की है, लेकिन दंड छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

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