”प्रथम टुडे
जबलपुर/नई दिल्ली। दिल्ली की साउथ रेवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal को कथित शराब नीति प्रकरण में ससम्मान बरी कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि “महीनों की जांच और सैकड़ों गवाहों के बावजूद अभियोजन पक्ष कोई ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं कर सका। ऐसे में मामला विचारण योग्य नहीं ठहरता।”
यह निर्णय सामने आते ही राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। आम आदमी पार्टी ने इसे “संविधान और न्याय की जीत” बताया, जबकि विपक्ष ने फैसले की विस्तृत प्रति का अध्ययन करने के बाद टिप्पणी करने की बात कही है।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली सरकार की पूर्व आबकारी नीति को लेकर केंद्रीय एजेंसियों ने अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। जांच एजेंसियों का दावा था कि नीति निर्माण और लाइसेंस वितरण में नियमों का उल्लंघन हुआ। इसी सिलसिले में कई नेताओं से पूछताछ हुई और गिरफ्तारियां भी हुईं।
इस प्रकरण में पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia सहित अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया गया था। आरोप था कि शराब नीति के जरिए निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। आम आदमी पार्टी लगातार इन आरोपों को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताती रही।
कोर्ट ने क्या कहा? (हाइलाइट बॉक्स के रूप में प्रकाशित किया जा सकता है)
अभियोजन पक्ष पर्याप्त और प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा।
प्रस्तुत दस्तावेज और गवाहियां आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं।
मामले में आरोप तय करने योग्य आधार नहीं बनता।
बिना ठोस साक्ष्य के लंबी अवधि तक अभियोजन न्यायसंगत नहीं।
विभागीय स्तर पर प्रक्रिया की समीक्षा की आवश्यकता बताई गई।
(नोट: विस्तृत आदेश की प्रति उपलब्ध होने पर कानूनी बिंदुओं का और विश्लेषण जोड़ा जा सकता है।)
डॉ. मुकेश जायसवाल की प्रतिक्रिया
जबलपुर में जारी प्रेस विज्ञप्ति में पूर्व प्रदेश संगठन मंत्री डॉ. मुकेश जायसवाल ने कहा, “झूठ का अंधेरा छंटा, न्याय का सूरज उगा। यह देश के करोड़ों लोगों की उम्मीदों की जीत है। शिक्षा, स्वास्थ्य और जनहित के कार्यों को रोकने के लिए साजिश रची गई थी, जो आज न्यायालय में टिक नहीं सकी।”उन्होंने कहा कि केजरीवाल को 156 दिन और मनीष सिसोदिया को 256 दिन जेल में रखा गया, लेकिन अंततः अदालत ने उन्हें निर्दोष पाया। डॉ. जायसवाल ने इसे “संवैधानिक मूल्यों की विजय” बताया।
राजनीतिक असर
फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे अपने शासन मॉडल—‘शिक्षा क्रांति’, ‘मोहल्ला क्लिनिक’, मुफ्त बिजली और महिलाओं की सुरक्षा—की वैचारिक जीत बताया। वहीं भाजपा ने कहा है कि वह आदेश की प्रति का अध्ययन कर आगे की रणनीति तय करेगी।


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