आईएफएमआईएस सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग कर 3 करोड़ से अधिक की शासकीय राशि का आहरण, दो प्रमुख कर्मचारी आरोपी
प्रथम टुडे
जबलपुर।जिले की 6वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल (SAF) में पदस्थ कर्मचारियों द्वारा फर्जी यात्रा भत्ता (टीए) बिल तैयार कर करोड़ों रुपये की शासकीय राशि के गबन का मामला सामने आया है। इस संबंध में थाना रांझी में अपराध क्रमांक 77/2026 दर्ज किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 01 जनवरी 2022 से 12 नवंबर 2025 के बीच का है। जांच में सामने आया है कि आईएफएमआईएस (IFMIS) सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग करते हुए फर्जी टीए बिल बनाए गए और शासकीय कोषालय से राशि का आहरण कर विभिन्न बैंक खातों में डलवाया गया।
जांच में क्या सामने आया
कार्यालय आयुक्त, कोष एवं लेखा, मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा संदिग्ध भुगतानों को लेकर कलेक्टर जबलपुर को पत्र भेजा गया था। इसके बाद 6वीं वाहिनी SAF में गठित जांच समिति ने यात्रा भत्ता शाखा, वेतन शाखा एवं मेडिकल शाखा के दस्तावेजों की जांच की।
जांच के दौरान पाया गया कि —
एक ही कर्मचारी के खाते में एक ही दिन में कई बार भुगतान हुआ
भुगतान की राशि वेतन से कई गुना अधिक थी
कई टीए बिलों की हार्ड कॉपी कार्यालय में उपलब्ध नहीं थी
एकमत होकर किया था गबन
रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन टीए शाखा प्रभारी निलंबित उप निरीक्षक (सउनि ‘अ’) सत्यम शर्मा और उनके सहायक आरक्षक अभिषेक झारिया (मृत) द्वारा एकमत होकर फर्जी टीए बिल तैयार किए गए।
इसके अलावा 11 अन्य खाताधारकों के नाम भी जांच में सामने आए हैं, जिनके खातों में टीए की राशि डाली गई और बाद में कथित तौर पर वह राशि आरोपियों के खातों में ट्रांसफर की गई।
वरिष्ठ अधिकारियों की आईडी का दुरुपयोग
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने वरिष्ठ अधिकारियों की आईडी और ओटीपी का दुरुपयोग कर IFMIS सिस्टम में बिल क्रिएट, अप्रूवल और ऑर्डर जारी किए।
डी.डी.ओ अप्रूवल नंबर 268 और स्वीकृति आदेशों में भी कथित रूप से कूटरचना की गई।
3 करोड़ के ऊपर का गबन
जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 से 2025 के बीच लगभग 3 से 3.50 करोड़ रुपये की शासकीय राशि के गबन का अनुमान है।
किन धाराओं में मामला दर्ज
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस और भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।

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