प्रथम टुडे
वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्लोबल टैरिफ को अवैध ठहराए जाने के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनियाभर के देशों पर 10% का नया ग्लोबल टैरिफ लागू करने का ऐलान कर दिया है। यह टैरिफ 24 फरवरी की आधी रात से लागू होगा।
इस फैसले से भारत को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि पहले प्रस्तावित उच्च दरों की तुलना में अब भारत पर कुल प्रभावी टैरिफ लगभग 18% से घटकर 10% रह जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला देते हुए कहा कि:
संविधान के अनुसार टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं,
यह अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के पास है।
कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन के पहले वाले व्यापक टैरिफ आदेश को असंवैधानिक बताया।
ट्रम्प का जवाब: सेक्शन 122 का इस्तेमाल
फैसले के बाद ट्रम्प ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे:
Trade Act 1974 के सेक्शन 122 के तहत टैरिफ लागू करेंगे
यह प्रावधान आर्थिक असंतुलन या व्यापार घाटे की स्थिति में राष्ट्रपति को अस्थायी (लगभग 150 दिन) के लिए टैरिफ लगाने की अनुमति देता है।
ट्रम्प ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “निराशाजनक” बताते हुए कुछ जजों की आलोचना भी की।
भारत को लेकर ट्रम्प का बड़ा बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने भारत पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा:
“भारत के साथ ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं होगा।”
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं।”
व्हाइट हाउस अधिकारियों के अनुसार:
भारत सहित उन देशों पर, जिनके साथ व्यापार वार्ता चल रही है,
अब अलग-अलग दरों के बजाय समान 10% ग्लोबल टैरिफ लागू होगा।
भारत पर क्या असर होगा
विशेषज्ञों के अनुसार:
भारत के निर्यातकों को राहत मिलेगी
अमेरिका में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बेहतर होगी
टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो पार्ट्स और फार्मा सेक्टर को फायदा मिल सकता है
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर सकारात्मक माहौल बनेगा
किन चीजों को मिली छूट
ट्रम्प प्रशासन ने कुछ उत्पादों को टैरिफ से बाहर रखा है, जैसे:
दवाइयां
कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स
महत्वपूर्ण खनिज
पैसेंजर वाहन
कुछ कृषि उत्पाद
ट्रम्प का तर्क
व्हाइट हाउस के अनुसार यह कदम:
व्यापार घाटा कम करने
डॉलर के बाहरी प्रवाह को रोकने
घरेलू उत्पादन बढ़ाने
के लिए उठाया गया है।
बड़ी तस्वीर
निक्सन के बाद पहली बार इस तरह का 10% वैश्विक टैरिफ मॉडल लागू हो रहा है
सेक्शन 122 का पहले कभी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल नहीं हुआ
इस फैसले को भविष्य में फिर अदालत में चुनौती दी जा सकती है

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