प्रथम टुडे | सच की बात सबके साथ
देशभर में आवारा कुत्तों के हमलों की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (13 जनवरी 2026) को कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। अदालत ने साफ कहा कि यदि किसी बच्चे, बुजुर्ग या नागरिक को कुत्ते के काटने से गंभीर चोट आती है या मौत होती है, तो राज्य सरकारें पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने के लिए बाध्य होंगी।
“कुत्तों को खाना खिलाने वाले भी होंगे जिम्मेदार” — सुप्रीम कोर्ट
मुख्य सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली पीठ ने टिप्पणी की कि आवारा कुत्तों को अनियंत्रित रूप से खिलाने-पिलाने वाले लोग भी इन घटनाओं के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा,
“अगर आप कुत्तों को रोजाना भोजन करा रहे हैं, तो उन्हें अपने घर में भी रखें। उन्हें सड़कों पर छोड़ देने से लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और संवेदनशीलता केवल पशुओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि मानव जीवन की रक्षा को लेकर राज्य किसी भी स्थिति में लापरवाही नहीं बरत सकते।
भावुक दलीलों पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि आवारा कुत्तों का मुद्दा सामाजिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर संवेदनशील है। इस पर अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा —
“भावुकता केवल कुत्तों के लिए ही क्यों? नागरिकों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।”
पिछले आदेशों की याद दिलाई
कोर्ट ने कहा कि नवंबर 2025 में भी उसने आदेश जारी कर सभी शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, रेलवे स्टेशनों और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने को कहा था, लेकिन कई राज्यों ने उस आदेश को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया।
इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी दोहराया कि
सार्वजनिक स्थानों में कुत्तों का अनियंत्रित प्रवेश रोका जाए
स्थानीय निकाय कुत्तों के प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक और मानवीय तरीके अपनाएं
लेकिन नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो
देशभर में बढ़ती घटनाएँ, सुप्रीम कोर्ट चिंतित
पिछले एक वर्ष में दिल्ली-एनसीआर सहित कई शहरों से ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जिनमें
बच्चों पर झुंड में हमला,
बुजुर्गों को गंभीर चोट,
कॉलोनियों एवं पार्कों में डर का माहौल
जैसे मामले बढ़े हैं। अदालत ने इन घटनाओं को चिंताजनक बताते हुए कहा कि राज्यों को कुत्ता नियंत्रण कार्यक्रमों को तेज करना होगा।
राज्यों को नई गाइडलाइन जारी करने के संकेत
आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इशारा दिया कि
जल्द ही राज्यों के लिए एकीकृत राष्ट्रीय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की जा सकती है जिसमें ये बिंदु शामिल होंगे—
कुत्तों की वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन की अनिवार्यता
खतरनाक कुत्तों को चिन्हित कर सुरक्षित स्थानों पर रखना
कॉलोनियों में फीडिंग जोन का वैज्ञानिक निर्धारण
हमलों की रिपोर्टिंग के लिए त्वरित डिजिटल प्रणाली
अगली सुनवाई में राज्य सरकारों से जवाब तलब
अदालत ने सभी राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों से पूछा है कि
वे अब तक क्या कदम उठा चुके हैं और भविष्य की योजना क्या है।
अगली सुनवाई में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

No comments:
Post a Comment