3 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने का आदेश
प्रथम टुडे | जबलपुर
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने एक भ्रष्टाचार प्रकरण की मूल केस डायरी गायब होने के गंभीर मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस लापरवाही को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए पुलिस महानिदेशक (विशेष पुलिस स्थापना-लोकायुक्त), भोपाल को निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ तीन दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज कर रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जाए।
कैसे सामने आया मामला
यह प्रकरण पीडब्ल्यूडी, जबलपुर में पदस्थ हेड क्लर्क अनिल कुमार पाठक से जुड़ा है। लोकायुक्त टीम ने उन्हें 26 अगस्त 2019 को 3 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। ट्रायल कोर्ट में मामला विचाराधीन था।
17 अक्टूबर 2023 को ट्रायल कोर्ट ने आवाज नमूना से जुड़े दस्तावेज रिकॉर्ड पर लेने का आदेश दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए पाठक ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।
फाइल मांगी तो पता चला—मूल केस डायरी गायब
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जब अदालत ने केस डायरी तलब की, तब लोकायुक्त की ओर से बताया गया कि मामले की मूल फाइल गुम है। इस खुलासे पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए लोकायुक्त एसपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए।
लोकायुक्त एसपी की पेशी और डीएसपी की स्वीकारोक्ति
निर्देश के पालन में लोकायुक्त एसपी अंजुलता पटले अदालत में पेश हुईं। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में तत्कालीन प्रभारी डीएसपी ऑस्कर किंडो ने माना है कि केस डायरी उनकी निगरानी में ही गुम हुई। कोर्ट ने इस स्वीकारोक्ति को अत्यंत गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए।
हाईकोर्ट का निर्देश—एफआईआर और विभागीय जांच शुरू करें
अदालत ने स्पष्ट कहा कि पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त:
3 दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करें
कार्रवाई की रिपोर्ट रजिस्ट्रार न्यायिक के समक्ष पेश करें
दोषी अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जाए, क्योंकि उनकी सेवानिवृत्ति में अभी चार वर्ष शेष हैं
हालांकि याचिकाकर्ता ने बाद में पुनरीक्षण याचिका वापस ले ली, लेकिन अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि फाइल गायब होने के मुद्दे पर दिए गए उसके आदेश प्रभावी रहेंगे और किसी भी स्तर पर इन्हें वापस नहीं माना जाएगा।

No comments:
Post a Comment