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Wednesday, January 7, 2026

संस्कारधानी में अपराध का राज: जनवरी में ही खून से लाल हुआ जबलपुर, पुलिस की कप्तानी पर गंभीर सवाल

 

2025 में थमी नहीं हत्याएं, 2026 की शुरुआत भी खून-खराबे से

प्रथम टुडे 

जबलपुर।संस्कारधानी कहलाने वाला जबलपुर अब धीरे-धीरे अपराधधानी में तब्दील होता नजर आ रहा है। वर्ष 2025 के जाते-जाते जहां शहर में हत्याओं का सिलसिला थमा नहीं था, वहीं 2026 के जनवरी महीने में ही लगातार हत्याओं ने शहर की कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है।

शाहपुरा और भेड़ाघाट बायपास पुल के नीचे हुई हत्या का मामला पुलिस अभी सुलझा ही पाई थी कि आज एक और सनसनीखेज हत्या ने शहर को झकझोर कर रख दिया।

सुबह-सुबह खून से सना गोहलपुर, भीड़भाड़ वाले इलाके में युवक की हत्या

ताजा मामला गोहलपुर थाना क्षेत्र का है, जहां आज सुबह करीब 7:30 बजे क्षेत्रीय छेत्री बस स्टैंड के पीछे, एक प्रसिद्ध निजी अस्पताल के पास, युवक की पत्थर पटककर निर्मम हत्या कर दी गई।

गोहलपुर थाना: सवाल नहीं, चिंता का संकेत

गोहलपुर थाना क्षेत्र को अब तक शहर के उन गिने-चुने इलाकों में माना जाता रहा है, जहां लंबे समय से शांति बनी हुई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते कुछ महीनों में इस थाना क्षेत्र में गंभीर आपराधिक घटनाएं नगण्य रही हैं, जिससे यह इलाका अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता था।

आज हुई हत्या ने निश्चित तौर पर शहर को झकझोरा है, लेकिन इस एक घटना के आधार पर गोहलपुर थाना की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाना जल्दबाजी होगी। इसके उलट, यह घटना इस ओर इशारा जरूर करती है कि शहर की समग्र कानून व्यवस्था किस हद तक दबाव में है।

अपराध का एक ऐसे थाना क्षेत्र में घटित होना, जिसे अब तक सुरक्षित माना जाता रहा हो, यह दर्शाता है कि अपराधी अब सीमाओं और थानों की परवाह किए बिना वारदात को अंजाम दे रहे हैं। यह स्थिति केवल किसी एक थाना नहीं, बल्कि पूरे पुलिस सिस्टम के लिए चेतावनी मानी जानी चाहिए।

इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि जब अपेक्षाकृत शांत इलाकों में भी इस तरह की वारदात होने लगे, तो क्या शहर की कानून व्यवस्था को नए सिरे से रणनीति और सख्त निगरानी की जरूरत  है?

मृतक की पहचान आकाश उर्फ अक्कू अहिरवार के रूप में हुई है।

हैरानी की बात यह है कि यह घटना ऐसे स्थान पर हुई, जहां सुबह से ही लोगों की आवाजाही बनी रहती है। इसके बावजूद अपराधियों ने बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दिया, जिससे पुलिस की सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

घटना की सूचना मिलते ही गोहलपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया। थाना प्रभारी का कहना है कि आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन घटना के तरीके ने पुलिस की तैयारियों पर सवालिया निशान लगा दिया है।

शराब, अतिक्रमण और खुलेआम अपराध — बस स्टैंड मैदान बना असामाजिक अड्डा

क्षेत्री बस स्टैंड का मैदान, जहां से अब दीनदयाल बस टर्मिनल के चलते यात्रियों की आवाजाही बढ़ गई है, पूरी तरह अवैध गतिविधियों का केंद्र बन चुका है।

बस स्टैंड से सटी शराब दुकान से लोग खुलेआम शराब लेकर मैदान में पीते हैं

रात होते ही सैकड़ों लोग यहां शराबखोरी करते नजर आते हैं

चाय-पान ठेलों की आड़ में पूरी तरह अतिक्रमण

सुबह मैदान में डिस्पोजल, शराब पाउच और गंदगी का अंबार

यह स्थिति केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि नगर निगम प्रशासन की भी गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और खुलेआम शराबखोरी पर न तो नियमित कार्रवाई हो रही है और न ही स्थायी समाधान।

एसपी की कप्तानी पर सवाल, शहर की कानून व्यवस्था निरंकुश

लगातार हो रही हत्याएं, चाकूबाजी, गोलीकांड और नशाखोरी ने आमजन को यह कहने पर मजबूर कर दिया है कि शहर के कप्तान यानी पुलिस अधीक्षक की कप्तानी में कानून व्यवस्था पूरी तरह बेलगाम हो चुकी है।

लोगों का आरोप है कि:

अच्छे और सख्त अधिकारियों के तबादले कर दिए गए

किसी को लाइन भेजा गया, किसी का थाना बदल दिया गया

जहां अपराध नियंत्रण में था, वहां फिर अराजकता लौट आई

घमापुर और गोरखपुर के उदाहरण, हटते ही बढ़ा अपराध

घमापुर थाना क्षेत्र में हाल ही में हुई बमबाजी और पथराव की घटनाओं को लेकर भी स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक एक महिला थाना प्रभारी वहां पदस्थ थीं, क्षेत्र में कानून व्यवस्था मजबूत थी।

उनके लाइन हाजिर होते ही अवैध शराब और अपराधियों का बोलबाला बढ़ गया।

इसी तरह रामपुर चौकी (गोरखपुर थाना) के प्रभारी को क्राइम ब्रांच भेजे जाने के बाद लोगों का कहना है कि मांडवा बस्ती जैसे इलाके, जहां अपराध लगभग समाप्त हो गए थे, वहां फिर से असामाजिक तत्व सिर उठाने लगे हैं।

इनामी आरोपी खुलेआम, पुलिस की पकड़ से बाहर

स्थिति यहां तक बिगड़ चुकी है कि इनामी आरोपी सरेआम घूम रहे हैं।

लॉर्डगंज थाना क्षेत्र का एक 5000 रुपये का इनामी आरोपी, जो ब्याज के धंधे और गोलीकांड का मुख्य आरोपी है, आज भी खुलेआम अपने गुर्गों से धमकियां दिलवा रहा है और अवैध वसूली कर रहा है।

यह हालात यह बताने के लिए काफी हैं कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और पुलिस की पकड़ कमजोर पड़ती जा रही है।

संस्कारधानी या अपराधधानी?

यह कहना अब अतिशयोक्ति नहीं होगी कि आज की संस्कारधानी, अपराधधानी बनती जा रही है।

अगर जल्द ही सख्त, निष्पक्ष और जमीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में हालात और भयावह हो सकते हैं।

शहर अब जवाब चाहता है —

क्या पुलिस अपराध पर काबू पाएगी या अपराध ही शहर की पहचान बन जाएगा?

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