निजी स्कूलों को राहत देने वाले हाईकोर्ट आदेश पर अभिभावकों की नाराज़गी, पेरेंट्स एसोसिएशन ने दोबारा याचिका की तैयारी के दिए संकेत - Pratham Today, Sach Ki Baat SabKe Saath -->

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Wednesday, December 24, 2025

निजी स्कूलों को राहत देने वाले हाईकोर्ट आदेश पर अभिभावकों की नाराज़गी, पेरेंट्स एसोसिएशन ने दोबारा याचिका की तैयारी के दिए संकेत

 

प्रथम टुडे | जबलपुर

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा हाल ही में निजी स्कूलों के पक्ष में दिए गए एक आदेश को लेकर प्रदेशभर के अभिभावकों में असंतोष गहराता जा रहा है। इस फैसले के खिलाफ मध्यप्रदेश पेरेंट्स एसोसिएशन ने कड़ा ऐतराज़ जताते हुए इसे बच्चों और अभिभावकों के अधिकारों के प्रतिकूल बताया है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि वह इस आदेश के विरुद्ध पुनः विधिक लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहा है।

इस संबंध में आयोजित पत्रकार वार्ता में पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिन गुप्ता, एसोसिएशन से जुड़े एडवोकेट सुरेंद्र वर्मा, गिरीश ठाकुर एवं अमित पलिया उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने हाईकोर्ट के आदेश, सरकार की भूमिका और आगे की रणनीति को लेकर अपनी बात रखी।

हाईकोर्ट की सुनवाई में उठा था संगठन के रजिस्ट्रेशन का मुद्दा

पेरेंट्स एसोसिएशन ने बताया कि इससे पहले निजी स्कूलों की अपील पर हाईकोर्ट की डिविजन बेंच में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एसोसिएशन से उसके रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा था। इस दौरान यह स्थिति सामने आई कि संगठन का विधिवत रजिस्ट्रेशन अब तक नहीं हुआ है।

कोर्ट द्वारा इस पर मौखिक टिप्पणी करते हुए संगठन को स्वघोषित बताया गया था। पत्रकार वार्ता में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी यह स्वीकार किया कि संस्था अभी तक पंजीकृत नहीं है, लेकिन लंबे समय से अभिभावकों के हितों को लेकर आंदोलन और कानूनी प्रयास किए जा रहे हैं।

सरकारी पक्ष कमजोर रहने का आरोप

पेरेंट्स एसोसिएशन ने इस पूरे मामले में राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। संगठन का आरोप है कि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ताओं द्वारा मध्यप्रदेश स्कूल फीस विनियमन अधिनियम, 2017 की प्रभावी और स्पष्ट व्याख्या नहीं की गई।

एसोसिएशन का कहना है कि यदि अधिनियम की मंशा और प्रावधानों को मजबूती से कोर्ट के समक्ष रखा जाता, तो संभवतः अभिभावकों के हित में स्थिति अलग हो सकती थी। इसी कमजोरी का लाभ निजी स्कूलों को मिला और उनके खिलाफ की गई प्रशासनिक कार्यवाहियां निरस्त कर दी गईं।

पहले रजिस्ट्रेशन, फिर नई याचिका

पत्रकार वार्ता में यह भी साफ किया गया कि अब पेरेंट्स एसोसिएशन सबसे पहले संस्था का विधिवत रजिस्ट्रेशन कराएगी। इसके पश्चात हाईकोर्ट में नई याचिका दायर कर, कानूनी रूप से मजबूत आधार के साथ अपना पक्ष रखा जाएगा।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उनके विरुद्ध की गई कार्यवाहियों को निरस्त कर दिया था। साथ ही मौखिक टिप्पणी में यह भी कहा गया था कि यदि अभिभावक निजी स्कूलों में बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहते, तो वे सरकारी स्कूलों का विकल्प चुन सकते हैं।

फैसले से अभिभावक आहत, आंदोलन जारी रहने के संकेत

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद बड़ी संख्या में अभिभावकों में निराशा और आक्रोश देखा जा रहा है। पेरेंट्स एसोसिएशन का कहना है कि यह मामला केवल फीस या स्कूल प्रबंधन का नहीं, बल्कि शिक्षा में समानता और अभिभावकों के अधिकारों से जुड़ा है।

लंबे समय से निजी स्कूलों की मनमानी फीस और अन्य मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रही पेरेंट्स एसोसिएशन अब संगठनात्मक और कानूनी रूप से खुद को मजबूत कर दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।

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