प्रथम टुडे | जबलपुर
स्मार्ट सिटी के नाम पर 66 करोड़ रुपये खर्च कर जबलपुर का एकमात्र प्रमुख खेल परिसर पंडित रवि शंकर शुक्ला स्टेडियम तो चमका दिया गया, लेकिन बुनियादी जरूरत पार्किंग को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
हकीकत यह है कि इस तथाकथित स्मार्ट स्टेडियम में पार्किंग स्थल है ही नहीं।
रोजाना सैकड़ों लोग, वाहन सड़क पर
सुबह-शाम मॉर्निंग वॉक, इवनिंग वॉक करने वाले नागरिक, नियमित खिलाड़ी और दर्शक रोजाना यहां पहुंचते हैं। स्टेडियम परिसर के भीतर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, खेल सामग्री की दुकानें, रेस्टोरेंट और कैफे भी संचालित हैं और प्रवेश पर शुल्क भी लिया जाता है।
इसके बावजूद वाहन खड़े करने की कोई व्यवस्था नहीं — नतीजा, चारों ओर की सड़कों पर अवैध पार्किंग और लगातार जाम।
कभी इसी स्टेडियम में 26 जनवरी और 15 अगस्त के राष्ट्रीय पर्व की आयोजन भी हुआ करते थे
यह वही स्टेडियम है जहां कभी 26 जनवरी और 15 अगस्त के मुख्य सरकारी आयोजन हुआ करते थे। इसके अलावा भी कई बड़े कार्यक्रम आयोजित हुए।
तब भी पार्किंग की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी और प्रशासन को मजबूरी में चारों ओर की सड़कों को बंद कर मार्ग परिवर्तित या डायवर्ट करना पड़ता था।
अब सवाल यह है कि जब तब भी समस्या थी, तो 66 करोड़ की योजना बनाते समय इससे सबक क्यों नहीं लिया गया?
आज रोजमर्रा में जाम, कल आयोजनों में क्या होगा?
आज हालात यह हैं कि सिर्फ रोज आने-जाने वाले लोगों के कारण ही यातायात चरमरा जाता है।
अगर भविष्य में फिर से बड़े खेल या सांस्कृतिक आयोजन हुए तो स्थिति कितनी भयावह होगी — इसका जवाब न स्मार्ट सिटी प्रशासन के पास है, न नगर निगम के पास।
स्मार्ट सिटी या स्मार्ट लापरवाही?
66 करोड़ खर्च होने के बाद भी यदि पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई, तो यह सीधे-सीधे
👉 योजना की विफलता,
👉 डिजाइन की खामी,
👉 और प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्मार्ट स्टेडियम की यह हालत बताती है कि स्मार्ट सिटी केवल इमारतों तक सीमित है, व्यवस्थाओं तक नहीं।

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