जबलपुर में चेतना महासम्मेलन विवाद से राजनीतिक टकराव तेज - Pratham Today, Sach Ki Baat SabKe Saath -->

Breaking

Wednesday, November 26, 2025

जबलपुर में चेतना महासम्मेलन विवाद से राजनीतिक टकराव तेज

संविधान की प्रति फाड़ने और धर्म विरोधी साहित्य बेचने के आरोपों ने तूल पकड़ा

 प्रथम टुडे  जबलपुर।

 चेतना महा-सम्मेलन में संविधान की प्रति फाड़ने और धर्म विरोधी किताबें बेचने को लेकर शुरु हुआ विवाद लगातार गरमाता जा रहा है। मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका है। रविवार को मानस भवन में कथित उपद्रव के दौरान कुछ युवकों की पिटाई हुई थी, जिसके बाद से दोनों पक्ष लगातार आमने-सामने हैं।

मंगलवार को कंट्रोल रूम के बाहर हंगामा, बुधवार को कांग्रेस का विरोध

बजरंग दल ने मंगलवार को पुलिस कंट्रोल रूम के बाहर विरोध दर्ज कराया। बुधवार को कांग्रेस ने सरकार और भाजपा पर निशाना साधते हुए मार्च निकाला। भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने पूरे विवाद को सुनियोजित बताते हुए कांग्रेस पर “मामले को राजनीतिक मोड़ देने” का आरोप लगाया।

मामले की शुरुआत जनचेतना महासम्मेलन से

विवाद की शुरुआत मानस भवन में आयोजित जनचेतना महासम्मेलन से हुई। हिंदू संगठनों पर आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान संविधान की प्रति फाड़ी गई और मंच पर उपद्रव किया गया। दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने आरोप लगाया कि आयोजन में “धर्म विरोधी पुस्तकें” बेची जा रही थीं, जिसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। हंगामे के दौरान कुछ युवकों की पिटाई भी हुई।

कांग्रेस का विरोध: गुलाब और संविधान लेकर भाजपा कार्यालय पहुंचे

बुधवार को कांग्रेस कार्यकर्ता रानीताल स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचे। उनके हाथ में संविधान की प्रतियां और गुलाब थे। कांग्रेस ने कहा कि वे संविधान दिवस पर भाजपा को प्रतीकात्मक तौर पर संविधान भेंट करना चाहते थे। लेकिन पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने ‘संविधान बचाओ’ के नारे लगाए।

कांग्रेस नगर अध्यक्ष सौरभ “नाटी” शर्मा ने कहा कि वे “सम्मानपूर्वक” संविधान की प्रति सौंपने आए थे, लेकिन भाजपा जिला अध्यक्ष रत्नेश सोनकर के न पहुंचने पर उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संविधान को मानने में ईमानदार नहीं है। कांग्रेस ने बाद में बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा के सामने संविधान वाचन करने की घोषणा की।

भाजपा का पलटवार: “पहले संविधान पढ़े कांग्रेसी

भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि सम्मेलन में ऐसे लोग मौजूद थे जो “राष्ट्र विरोधी गतिविधियों” में शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि “धर्म विरोधी किताबों” के सवाल को “संविधान फाड़ने” के मुद्दे से जोड़ा गया ताकि भ्रम पैदा हो।

रत्नेश सोनकर ने यह भी कहा—

कांग्रेस संविधान की बात करती है, जबकि उसकी पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाकर संविधान की धज्जियां उड़ाई थीं और भाजपा नेताओं को जेल में डाला गया था।”

कंट्रोल रूम के बाहर फिर तनाव

धर्म विरोधी साहित्य बेचने के आरोप में बजरंग दल द्वारा FIR दर्ज कराने के बाद मंगलवार को एसटी-एससी-ओबीसी संघ, अजाक्स और बहुजन समाज संगठन ज्ञापन देने पहुंचे। इसी दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए।

सूचना मिलते ही हिंदू संगठन लाठियों के साथ मौके पर आ गए, जिनमें महिला प्रकोष्ठ की कार्यकर्ता भी शामिल थीं। दोनों पक्षों में टकराव की स्थिति बन गई। कुछ लोग जान बचाने के लिए कंट्रोल रूम के अंदर चले गए। पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रित किया।

एसटी-एससी-ओबीसी संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार हिंदू संगठनों को संरक्षण दे रही है और वंचित वर्गों की आवाज दबाई जा रही है।

कांग्रेस में बढ़ती गुटबाजी?

आज के विरोध कार्यक्रम में कांग्रेस नगर अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा अकेले नजर आए। शहर जिला कांग्रेस के इस कार्यक्रम में 100 से अधिक कार्यकर्ता नहीं जुट सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे कांग्रेस में गुटबाजी और नेतृत्व संकट की स्थिति स्पष्ट होती है।

राजनीतिक तनाव चरम पर

चेतना सम्मेलन विवाद से लेकर पिटाई और कंट्रोल रूम पर हुए टकराव के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो चुकी है।

कांग्रेस इसे “संविधान बचाओ” की लड़ाई बता रही है, तो भाजपा इसे “सुनियोजित झूठ और भ्रामक प्रचार” बता रही है।

पुलिस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलर्ट पर है।






No comments:

Post a Comment