भरतनाट्यम, कथक व ओड़िसी की मनमोहक प्रस्तुतियों ने जीता दर्शकों का दिल
प्रथम टुडे जबलपुर।
शहीद स्मारक सभागार में रविवार की शाम शास्त्रीय कला के रंगों से सराबोर रही। नृत्यांजलि कला अकादमी द्वारा आयोजित कला उत्सव 2025 में जब नृत्यांगनाओं ने भरतनाट्यम, कथक और ओड़िसी की सामूहिक प्रस्तुतियाँ मंच पर दीं, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम में 76 कलाकारों ने भाग लेकर अपनी कला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शास्त्रीय नृत्य की ओर युवाओं का झुकाव दिखा
जहाँ एक ओर आधुनिकता और पाश्चात्य संस्कृति की ओर युवाओं का रुझान बढ़ता दिख रहा है, वहीं इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि आज की युवा पीढ़ी शास्त्रीय नृत्य की गरिमा और सुंदरता से भी गहरा जुड़ाव रखती है। मंच पर युवा कलाकारों का आत्मविश्वास और शास्त्रीय तकनीक की परिपक्वता देखकर दर्शकों ने भी इसकी मुक्त कंठ से सराहना की।
हर प्रस्तुति पर तालियों की गूंज
भरतनाट्यम की लयबद्धता, कथक की घूमरें और ओड़िसी के भावों ने दर्शकों को ऐसा बांधा कि हर प्रस्तुति के बाद तालियों की उठा-पटक लंबी देर तक चलती रही।
श्रोता शास्त्रीय नृत्य की इस श्रृंखला से इतने अभिभूत हुए कि पूरा सभागार मंत्रमुग्ध सा नज़र आया।
विशेष रूप से छोटी उम्र की नृत्यांगनाओं ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का मन जीत लिया।
नत्यांजलि की नृत्यांगनाओं ने मन मोह लिया
कार्यक्रम में दीपमाला सिंह, प्रकृति, दीपिका, तन्वी, अंजलि सहित श्रद्धांजलि समूह की नृत्यांगनाओं ने शास्त्रीय शैलियों की खूबसूरत छटा बिखेरी। इनकी प्रस्तुति को दर्शकों से सबसे अधिक प्रशंसा मिली।
फाइन आर्ट प्रदर्शनी बनी विशेष आकर्षण
कला उत्सव के अंतर्गत फाइन आर्ट के कलाकारों ने भी प्रकृति, अध्यात्म और विविध सामाजिक विषयों पर आधारित अपनी चित्रकृतियाँ प्रदर्शित कीं, जिसने आगंतुकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
कार्यक्रम की संयोजन
समारोह की संयोजना नृत्य निर्देशिका कामना नायक एवं आरुक्षा नायक ने की।
समारोह का शुभारंभ नृत्यांजलि कला अकादमी के कलाकारों ने किया।
स्वागत अथर्व नायक ने,
संचालन राजेश पाठक प्रवीण ने
और आभार शलभ नायक ने व्यक्त किया।
कलाकारों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के पश्चात सभी कलाकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजन की सांस्कृतिक गरिमा और युवा प्रतिभाओं के उत्साह ने इस शाम को एक यादगार आयाम दिया


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