जबलपुर की कला जगत में शोक — 78 वर्ष की आयु में इंदौर में हुआ निर्धन
ए
प्रथम टुडे जबलपुर।
शहर के वरिष्ठ तबला वादक और संगीत जगत में तालमणि की उपाधि से सम्मानित करोड़ी लाल भट्ट का 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले डेढ़ वर्ष से इंदौर में अपने पुत्र रवि भट्ट के साथ रह रहे थे और बीमार चल रहे थे। बताया गया कि पिछले छह महीनों से उनकी तबीयत लगातार खराब थी।
राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान
करोड़ी लाल भट्ट ने अपने संगीत जीवन में देश के अनेक दिग्गज कलाकारों के साथ मंच साझा किया।
उन्होंने सुप्रसिद्ध सितार वादक पंडित रविशंकर और महान सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान सहित कई प्रमुख कलाकारों के साथ संगत कर जबलपुर को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया।
उनके पुत्र रवि भट्ट, जो स्वयं एक कुशल तबला वादक हैं, ने पिता को अपने जीवन का सबसे बड़ा गुरु बताया।
कला जगत में दुख की लहर
करोड़ी लाल भट्ट के निधन से जबलपुर में संगीत और कला जगत में गहरा दुख व्याप्त है।
तबला वादक रामेश्वर सोनी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा—
> “करोड़ी लाल भट्ट जबलपुर की सांस्कृतिक पहचान थे। उनका जाना कला जगत की अपूर्णीय क्षति है।”
उधर प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक अनवर हुसैन ने भावुक स्वर में कहा—
> “करोड़ी लाल जी के साथ मंच पर जुगलबंदी हमेशा अविस्मरणीय रही। कई मौकों पर पूरा सभागार शांत हो जाता था और सिर्फ संगीत बोलता था। आज हमने अनमोल कलाकार खो दिया है।”
अविस्मरणीय प्रस्तुति
सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना दीपा दीक्षित ने भी भावुक होकर यादें साझा कीं—
> “एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि चतुरंगी राग में संगत आज से पहले किसी कथक नर्तकी के साथ नहीं की। वह पल चुनौती भी था और सौभाग्य भी। प्रस्तुति समाप्त होने के बाद लगभग 10 मिनट तक तालियां बजती रहीं। वह क्षण आज भी मन में जीवित है।”
संगीत की विरासत आगे बढ़ा रहे शिष्य
करोड़ी लाल भट्ट ने तबला वादन के क्षेत्र में न केवल प्रदर्शन किया बल्कि शिक्षा का कार्य भी किया।
उनके सैकड़ों शिष्य आज देशभर में तबला वादन की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और उनके नाम को संगीत की विरासत के रूप में संजो रहे हैं।
जबलपुर ने खोया अपना सांस्कृतिक रत्न
करोड़ी लाल भट्ट के निधन से जबलपुर की कला और सांस्कृतिक धरोहर को गहरा आघात पहुंचा है।
उनका योगदान संगीत जगत में सदैव स्मरणीय रहेगा।


No comments:
Post a Comment