प्रथम टुडे जबलपुर।
संस्कारधानी जबलपुर का मुख्य गणेश विसर्जन चल समारोह हर साल विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। शहर के लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर बैठकर देर रात तक प्रतिमाओं के दर्शन करते हैं। लेकिन इस बार श्रद्धालुओं को निराशा हाथ लगी। रविवार रात आयोजित मुख्य चल समारोह में मात्र चार गणेश प्रतिमाओं ने ही भाग लिया।
इस बार केवल चार प्रतिमाएं
चल समारोह की शुरुआत तीन पत्ती से हुई। सबसे पहले विधायक लखन घनघोरिया, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और विधायक अभिलाष पांडे ने प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना कर आरती उतारी।
इस बार शामिल हुई चार प्रमुख प्रतिमाएं थीं –
- दरहाई गणेश प्रतिमा
- गोपाल बाग का राजा
- पीपल मठ की गणेश प्रतिमा
- आगा चौक गणेश प्रतिमा
परंपरा से अलग नज़ारा
पिछले वर्ष इस चल समारोह में आठ प्रतिमाएं शामिल हुई थीं, वहीं कुछ साल पहले तक यहां 12 से 14 छोटी-बड़ी प्रतिमाएं निकला करती थीं। लेकिन इस बार गणेश प्रतिमाओं की संख्या घटकर केवल चार रह जाना श्रद्धालुओं के लिए अचंभे और मायूसी का कारण बना।
समितियों की अलग राह
गणेश समितियों के सदस्यों का कहना है कि मुख्य चल समारोह देर रात शुरू होता है और प्रतिमाओं को विसर्जन स्थल हनुमानताल तक पहुंचते-पहुंचते सुबह हो जाती है। ऐसे में कई समितियां अब मुख्य चल समारोह से अलग होकर स्वयं का जुलूस निकाल रही हैं और प्रतिमाओं का विसर्जन हनुमानताल या ग्वारीघाट स्थित कुंडों में कर रही हैं।
प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति
पिछले वर्षों की तुलना में इस बार चल समारोह में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति भी बेहद कम रही। केवल महापौर अन्नू, विधायक लखन घनघोरिया और विधायक अभिलाष पांडे ही समारोह में सक्रिय रूप से शामिल हुए। दोनों विधायक जुलूस की अगुवाई भी करते नज़र आए।
भविष्य को लेकर सवाल
जबलपुर का दशहरा चल समारोह जिस तरह देशभर में प्रसिद्ध है, उसी तरह उम्मीद की जाती थी कि गणेश विसर्जन चल समारोह भी आने वाले समय में संस्कारधानी की पहचान बनेगा। लेकिन इस बार प्रतिमाओं की बेहद कम संख्या और समितियों के अलग-अलग आयोजन ने इस परंपरा के भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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