"महिलाओं का अपमान या सामाजिक चिंता? एनएफएचएस आंकड़ों की आड़ में बयान से मचा राजनीतिक घमासान"
जब प्रदेश की महिलाएं तीज के व्रत में आस्था की मिसाल बन रहीं थीं, तब एक बयान ने समूचे माहौल को राजनीतिक उबाल में तब्दील कर दिया।
प्रथम टुडे जबलपुर।
कांग्रेस नेता जीतू पटवारी का एक बयान उस समय विवादों में आ गया, जब राज्य सहित पूरे देश की महिलाएं हरितालिका तीज के अवसर पर निर्जला उपवास रखकर पारंपरिक श्रद्धा जता रहीं थीं। इसी दिन, जबलपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पटवारी ने दावा किया कि “मध्य प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा महिलाएं शराब पीती हैं।”
बयान से मचा हड़कंप
जब पत्रकारों ने इस विवादित टिप्पणी पर उन्हें घेरा और पूछा कि क्या वह मानते हैं कि मध्य प्रदेश महिलाओं में शराब सेवन में शीर्ष पर है, तो पटवारी ने सफाई देते हुए कहा:
यह मैं नहीं कह रहा, यह एनएफएचएस (नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे) की रिपोर्ट कह रही है। यह आंकड़े केंद्र सरकार की रिपोर्ट में जारी किए गए हैं, और उसी से मैंने यह बात कही है।
हकीकत क्या है? आंकड़े क्या कहते हैं?
जीतू पटवारी के दावे के विपरीत, एनएफएचएस-5 (2019-21) के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश महिलाओं में शराब सेवन के मामले में 9वें स्थान पर आता है, और वहां का प्रतिशत महज़ 0.4% है।
शीर्ष 5 राज्यों के आंकड़े इस प्रकार हैं:
- अरुणाचल प्रदेश – 17.3%
- सिक्किम – 14.8%
- असम – 5.5%
- तेलंगाना – 4.9%
- गोवा – 4.8%
मध्य प्रदेश – 0.4% (9वां स्थान)
यह साफ दर्शाता है कि मध्य प्रदेश महिलाओं में शराब सेवन की दर काफी कम है और "सबसे ज्यादा" कहना तथ्यों से परे है।
राजनीतिक तूफान: भाजपा का तीखा हमला
बयान को लेकर भाजपा ने कड़ा विरोध जताया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इसे "मध्य प्रदेश की महिलाओं का अपमान" बताते हुए कहा:
“जीतू पटवारी, जो राहुल गांधी के कृपापात्र हैं, ने बेहद शर्मनाक बयान दिया है। हरितालिका तीज जैसे पवित्र पर्व पर ऐसा बोलना महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।”
मुख्यमंत्री मोहन यादव का तीखा पलटवार
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा:
“आज जब प्रदेश की बहनें उपवास करके हरितालिका तीज मना रही हैं, ऐसे समय पर इस तरह का बयान देना अपमानजनक है। जीतू पटवारी को प्रदेश की बहनों से तुरंत माफी मांगनी चाहिए।”
जीतू पटवारी की सफाई: ‘मैं तो नशे से बर्बादी की बात कर रहा था’
विवाद गहराने पर जीतू पटवारी ने कहा:
“मैंने तो सिर्फ यह कहा कि शराब के कारण कई परिवार बर्बाद हो रहे हैं और युवा पीढ़ी इसकी चपेट में है। मेरी चिंता महिलाओं को लेकर नहीं, समाज में बढ़ते नशे के प्रभाव को लेकर थी।”
हालांकि, उनकी यह सफाई राजनीतिक तूफान को थाम नहीं सकी।सं
संवेदनशीलता बनाम बयानबाजी
जहां एक ओर एनएफएचएस की रिपोर्ट में तथ्य स्पष्ट हैं, वहीं यह भी तय है कि सार्वजनिक मंच पर शब्दों का चयन नेताओं की ज़िम्मेदारी है। ख़ासतौर पर जब सामाजिक और सांस्कृतिक पर्व चल रहे हों, तब ऐसे बयान राजनीतिक नुकसान तो करते ही हैं, साथ ही सामाजिक ताने-बाने को भी चोट पहुंचाते हैं।

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