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Thursday, July 3, 2025

वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर विकसित होगा ‘फॉरेस्ट सफारी - ज़ू कम रेस्क्यू सेंटर’ और ठाकुरताल पर्यटन हब

 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के अनुरूप जबलपुर बनेगा पर्यटन का नया केंद्र : लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह









 प्रथम टुडेजबलपुर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मध्यप्रदेश को पर्यटन के क्षेत्र में एक नई ऊँचाई पर ले जाने के संकल्प के तहत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर जबलपुर को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यह परियोजना वीरांगना रानी दुर्गावती के गौरवपूर्ण नाम पर आधारित होगी, जिससे शहर को नया गौरव और राष्ट्रीय पहचान प्राप्त होगी।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि मदन महल की पहाड़ियों पर स्थित ठाकुरताल क्षेत्र को एक विशिष्ट पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत 'फॉरेस्ट सफारी - ज़ू कम रेस्क्यू सेंटर' और संग्राम-सागर तालाब का समग्र विकास प्रस्तावित है। इस संबंध में मंत्री राकेश सिंह ने आज भोपाल में वन मंडल अधिकारी ऋषि मिश्रा और परियोजना सलाहकार दुबे के साथ विस्तृत बैठक कर योजना की रूपरेखा तैयार की।

इस परियोजना को लगभग 85 से 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल में विस्तारित किया जाएगा। यहाँ पर्यटकों को आधुनिक तकनीकों और प्राकृतिक वन्य जीवन के अद्वितीय अनुभव प्राप्त होंगे। परियोजना में रोबोटिक इंटरप्रिटेशन सेंटर, बटरफ्लाई पार्क, लॉन्ग कार्निवल और अन्य अत्याधुनिक सुविधाएँ शामिल होंगी। यहाँ येलो टाइगर, व्हाइट टाइगर, पैंथर, शेर, भालू, मगरमच्छ, साँप, और विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के लिए अलग-अलग सेक्शन बनाए जाएंगे। साथ ही ज़ेब्रा, जिराफ जैसे विदेशी जानवरों के लिए विशेष एग्जॉटिक जोन और वॉटर इंटरप्रिटेशन सेंटर भी प्रस्तावित हैं।

पर्यटकों को रोमांचक अनुभव प्रदान करने के लिए इस क्षेत्र को संग्राम-सागर तालाब से लेकर ठाकुरताल तक ट्रैकिंग, ज़िपलाइन और बोटिंग जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। ठाकुरताल में ‘फॉरेस्ट बाथिंग’, व्यूपॉइंट्स और प्रकृति से जुड़ाव को बढ़ाने वाले स्थान विकसित किए जाएंगे।

मंत्री सिंह ने बताया कि इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) आगामी तीन माह के भीतर तैयार कर ली जाएगी, जिसके पश्चात विकास कार्यों की शुरुआत की जाएगी। यह परियोजना जबलपुर को न केवल वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर के संवर्धन की दिशा में भी मील का पत्थर सिद्ध होगी।

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