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Wednesday, July 2, 2025

गांजा तस्करी करने वाले गिरोह का एसटीएफ ने किया पर्दाफाश, 120 किलो गांजा जब्त — गिरोह का सरगना समेत तीन गिरफ्तार

 




 प्रथम टुडे /जबलपुर/उमरिया। मध्यप्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एसटीएफ जबलपुर इकाई ने एक संगठित गिरोह का भांडाफोड़ किया है। गिरोह के सरगना समेत तीन लोगों को गिरफ्तार करते हुए उनकी कार से लगभग 120 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद किया गया है।

यह कार्रवाई एसटीएफ के विशेष पुलिस महानिदेशक पंकज कुमार श्रीवास्तव (भा.पु.से.) के निर्देशों पर की गई, जिन्होंने सभी यूनिटों को संगठित अपराधों में संलिप्त आरोपियों की पहचान कर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

इस कार्रवाई का संचालन पुलिस अधीक्षक (एसटीएफ) राजेश सिंह भदौरिया एवं एआईजी नवीन कुमार चौधरी के निर्देशन में किया गया। टीम का नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक कल्याणी वरकडे और संतोष तिवारी ने किया।

:इस तरह पहुंची एसटीएफ गिरोह तक

एसटीएफ जबलपुर को पुख्ता सूचना मिली थी कि मानपुर ताला से उमरिया की ओर एक बिना नंबर की सिल्वर रंग की स्विफ्ट डिजायर कार में मादक पदार्थ गांजा की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर ताला वन विभाग बैरियर पर टीम ने घेराबंदी कर संदिग्ध कार को रोका।

 पकड़ी गए यह आरोपी 

1. शिवम उर्फ इन्द्र बहादुर सिंह, पिता प्रेम नारायण सिंह वैश्य, उम्र 27 वर्ष, निवासी ग्राम बरतरा, थाना खैरहा, जिला शहडोल (कार चालक)।

2. करन सिंह, पिता ध्रुव बहादुर सिंह चंदेल, उम्र 30 वर्ष, निवासी सोहागपुर वार्ड क्रमांक 04, बाणगंगा, शहडोल।

3. प्रदीप कुमार पटैल, पिता राजबली पटैल, उम्र 34 वर्ष, निवासी ग्राम सिगुड़ी, थाना मानपुर, जिला उमरिया।

कार की तलाशी लेने पर उसमें चार काले प्लास्टिक की बोरियों में भूरे रंग के पैकेट पाए गए, जिनमें भारी मात्रा में गांजा भरा था। पूछताछ में तीनों आरोपियों ने मादक पदार्थ गांजा होना स्वीकार किया और अपना अपराध कबूल किया।

120 किलो गांजा जब्त,

जप्त गांजा की मात्रा लगभग 120 किलोग्राम बताई गई है, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत लाखों में है। आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।

 नशे के सौदागरों पर एसटीएफ की सख्ती:

एसटीएफ की यह कार्रवाई केवल गांजा की तस्करी तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की पहचान कर रही है। राज्य में लगातार सामने आ रहे ऐसे नेटवर्क के खिलाफ यह कार्रवाई मिसाल बन सकती है।

 परिवहन माध्यम और पहचान से बचने की कोशिश:

बिना नंबर प्लेट की कार और अलग-अलग जिलों के तस्करों को साथ लाना, गिरोह की संरचना और सोच-समझकर किया जा रहा काम दर्शाता है।

 सवाल उठते हैं:

क्या इन आरोपियों का संबंध किसी अंतरराज्यीय गिरोह से है? कहां से लाया गया यह गांजा? क्या स्थानीय स्तर पर और भी संलिप्त लोग हैं?

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