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Wednesday, June 11, 2025

थानों में लंबे समय से जमे पुलिसकर्मियों पर अब गिरेगी गाज: PHQ का बड़ा फैसला

 

अब एक थाने में 5 साल और एक पद पर अधिकतम 4 साल से ज्यादा नहीं रह सकेंगे पुलिसकर्मी


प्रथम टुडे जबलपुर :-
- मध्यप्रदेश
पुलिस विभाग ने कानून-व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) द्वारा जारी ताज़ा आदेश के मुताबिक अब प्रदेश के किसी भी पुलिसकर्मी को एक ही थाने में अधिकतम 5 वर्ष से अधिक नहीं रखा जाएगा। साथ ही एक ही पद पर उसकी तैनाती की सीमा 4 वर्ष तय कर दी गई है।

यह नया निर्देश आरक्षक से लेकर निरीक्षक स्तर तक के पुलिसकर्मियों पर समान रूप से लागू होगा। आदेश का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है।

 मुख्य बिंदु: आदेश की प्रमुख बातें

एक पद पर तैनाती: एक थाने में एक ही पद पर अधिकतम 4 वर्ष की सीमा तय।

थाने में कुल अवधि: कोई भी पुलिसकर्मी एक थाना क्षेत्र में अधिकतम 5 वर्ष तक ही रह सकेगा।

दोबारा पोस्टिंग पर रोक: कार्यकाल पूर्ण करने के बाद कम से कम 3 साल तक उसी थाने में पुन: तैनाती नहीं दी जाएगी।

सब डिवीजन में अवधि: एक ही सब डिवीजन में विभिन्न पदों पर मिलाकर भी अधिकतम 10 वर्षों तक ही सेवाएं दी जा सकेंगी।

 PHQ का उद्देश्य क्या है?

स्थायी सत्ता केंद्र और गुटबाजी को तोड़ना

लंबे समय तक एक थाने में रहने से बनने वाले नेटवर्क और सत्ता संतुलन को समाप्त करना।

पारदर्शी और निष्पक्ष पुलिसिंग

फील्ड पोस्टिंग में नियमित बदलाव से जनता के साथ विश्वास कायम करना।

अनुशासन और जवाबदेही में वृद्धि

थानों में पदस्थापना के लिए तय समय सीमा से कार्य में जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करना।

स्थानीय प्रभाव को कम करना

लंबे समय तक एक क्षेत्र विशेष में पदस्थ रहने से होने वाले 'स्थानीय दबाव' को समाप्त करने की दिशा में अहम प्रयास।

 डीजीपी का बयान

राज्य पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री सम्पत उपाध्याय ने आदेश जारी करते हुए कहा,

यह व्यवस्था पुलिस व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने के लिए की गई है। लंबे समय तक एक थाने या सब डिवीजन में तैनाती से कई तरह की प्रशासनिक और सामाजिक जटिलताएं उत्पन्न होती हैं। यह आदेश उन्हीं को समाप्त करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।"


कई जिलों से लगातार शिकायतें आ रही थीं कि कुछ पुलिसकर्मी एक ही थाने में वर्षों से जमे हुए हैं।

ऐसे कर्मचारियों की स्थानीय नेटवर्किंग और राजनैतिक प्रभाव के कारण निष्पक्ष कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही थी।

इससे कई जगह भ्रष्टाचार, सत्ता गुट और जनता से दूरी की स्थितियां बनीं।

विभागीय जांचों में यह भी सामने आया कि कार्यों में ढिलाई और आरोपियों से मिलीभगत जैसी घटनाओं में ऐसे कर्मचारियों की भूमिका पाई गई।

 इस आदेश से क्या बदलेगा?

फील्ड ड्यूटी में नियमितता आएगी।

हर थाने को नई ऊर्जा और नई कार्यशैली मिलेगी।

भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी

जनता को निष्पक्ष और जवाबदेह पुलिस सेवा मिलेगी।

 कौन-कौन आएगा दायरे में?

यह आदेश आरक्षक, प्रधान आरक्षक, सहायक उपनिरीक्षक, उपनिरीक्षक और निरीक्षक स्तर के सभी पुलिसकर्मियों पर लागू होगा।

यह आदेश मध्यप्रदेश पुलिस व्यवस्था में संस्थागत सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे जहां पुलिसकर्मियों की कार्यशैली में सुधार की उम्मीद है, वहीं आम नागरिकों को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और निष्पक्ष पुलिसिंग अनुभव प्राप्त होगा

रिपोर्ट: अनुराग दिक्षित: प्रथम टुडे

 11 जून 2025

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