प्रथम टुडे जबलपुर । प्लॉट दिलाने के नाम पर भोले-भाले निवेशकों को झांसा देकर करोड़ों रुपये हड़पने वाले 'अर्थ बिल्डर्स' के खिलाफ तहसीलदार की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बिल्डर नीरज ललित प्रताप सिंह ने कथित रूप से सरकारी ज़मीन पर फर्जी लेआउट बनाकर बिक्री की और कई ग्राहकों से करोड़ों की रकम वसूल कर उन्हें धोखा दिया।
फर्जी वादों में फंसकर गंवाई जमा-पूंजी
जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि दर्जनों निवेशकों ने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर लाखों रुपये का भुगतान किया, लेकिन न तो उन्हें रजिस्ट्री मिली और न ही किसी प्रकार का विकास कार्य हुआ। सुनील चौकसे, राजेश कुमार महोबिया, नितिन श्रीवास्तव, पीयूष दुबे, कृष्ण कुमार, राकेश साहू, राजेंद्र सोनी, प्रवीण सोनी और दीपक सावलानी जैसे पीड़ितों ने तहसील कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है।
सरकारी ज़मीन पर दिखाए गए प्लॉट
कुछ मामलों में प्लॉट उस ज़मीन पर दिखाए गए, जो वास्तव में राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज है — जिसकी न तो बिक्री हो सकती है और न ही रजिस्ट्री। इसके बावजूद बिल्डर ने रजिस्ट्री के नाम पर ग्राहकों से बड़ी रकम वसूल की।
नामांतरण में आया खुलासा
हरीश कुमार सचदेव, अतुल अरोरा, दिलीप यादव और देवा शर्मा जैसे लोगों को प्लॉट की रजिस्ट्री तो मिली, लेकिन जब वे नामांतरण के लिए पहुंचे तो पता चला कि रकबा (भूमि माप) रजिस्ट्री के मुकाबले कम था। बिल्डर ने खसरे में दर्ज जमीन से अधिक भूमि बेच दी थी।
मौके की ज़मीन और रजिस्ट्री में अंतर
अजय पेशवानी और पवन खत्री ने बताया कि उन्हें जो भूमि दिखाई गई थी, वह न तो रजिस्ट्री के खसरा नंबर से मेल खाती थी और न ही सीमांकन (चौहद्दी) से। इससे साफ होता है कि जानबूझकर धोखाधड़ी की गई।
दोगुना रिटर्न का झांसा
एक अन्य मामला उमाशंकर यादव का है, जिनसे 20 लाख रुपये यह कहकर लिए गए कि रकम दो साल में दोगुनी कर दी जाएगी या फार्मलैंड दिया जाएगा। लेकिन न रकम लौटी और न ज़मीन मिली।
सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्जा और निर्माण
जांच में खुलासा हुआ है कि बिल्डर नीरज सिंह ने जबलपुर के जोगीढाना क्षेत्र में खसरा नंबर 4, 9, 11, 12, 13, 15, 16 और 33 की कुल 6.47 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर पक्के निर्माण कर लिए। यहां गेट, बाउंड्री वॉल, गार्डन और फार्म हाउस तक बना दिए गए। इस अवैध कब्जे पर पहले से ही राजस्व न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 0011/अ-68/2024-25 लंबित है।
फर्जी दस्तावेज और झूठे अनुबंध
तहसीलदार की रिपोर्ट के अनुसार, बिल्डर ने हर्रई क्षेत्र में ऐसी ज़मीन का अनुबंध किया जिसका वह मालिक ही नहीं था। उसने फर्जी लेआउट और जाली दस्तावेजों के जरिए एक करोड़ ग्यारह लाख ग्यारह हजार तीन सौ बीस रुपये की रकम वसूल ली, लेकिन न तो बिक्री पत्र (सेल डीड) निष्पादित किया और न ही जमीन का वैध हस्तांतरण किया।
जलसाज बिल्डर गिरफ्तार गिरफ्तार
जांच के बाद जबलपुर पुलिस ने आरोपी नीरज ललित प्रताप सिंह के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी मूल रूप से रीवा के नया बस स्टैंड, समान थाना क्षेत्र का निवासी है, और जबलपुर में पचौरी टॉवर (राइट टाउन), सतपुड़ा एवेन्यू, संजीवनी नगर और गढ़ा में ठिकाने बना रखा था।
निवेशकों के लिए चेतावनी
यह मामला उन सभी लोगों के लिए बड़ी चेतावनी है जो बिना दस्तावेजों की पूरी जांच किए प्रॉपर्टी में निवेश कर बैठते हैं। यह साफ हो चुका है कि कुछ बिल्डर सिर्फ लाभ के लिए आम जनता की गाढ़ी कमाई और सपनों को कुचलने से नहीं हिचकते। अब देखना होगा कि इस घोटाले में पीड़ितों को न्याय कब और कैसे मिलता है।
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