प्रथम टुडे जबलपुर। विजयनगर स्थित होटल वेलवेट में पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई के बाद यह सवाल एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है कि आखिर शहर में चल रहे सैकड़ों स्पा सेंटरों की आड़ में चल रहे कथित देह व्यापार पर प्रशासन की निगरानी क्यों नहीं है? महिला थाना प्रभारी और क्राइम ब्रांच द्वारा की गई कार्रवाई की स्थानीय लोगों ने सराहना की है, लेकिन यह भी पूछा जा रहा है कि अन्य क्षेत्रों में इसी तरह के सेंटर क्यों अनदेखे रह जाते हैं।
क्या हो रहा है स्पा सेंटरों के भीतर?
विजयनगर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में स्पा सेंटर खुल चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, कई स्थानों पर “मसाज थेरेपी” के नाम पर कथित रूप से सेक्स रैकेट संचालित हो रहे हैं। ग्राहक को मसाज के दौरान “एक्स्ट्रा सर्विस” का प्रस्ताव दिया जाता है, जिसके एवज में 1000 से 5000 रुपये तक वसूले जाते हैं। इस गतिविधि पर कानून की सीधी अनदेखी, प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े कर रही है।
कौन है जिम्मेदार?
स्पा सेंटरों को नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा लाइसेंस जारी किए जाते हैं। ऐसे में यह सवाल अहम है कि जब इन सेंटरों में अवैध गतिविधियों की शिकायतें आ रही हैं, तो स्थानीय प्रशासन की निरीक्षण टीमों द्वारा नियमित जांच क्यों नहीं की जाती? क्या इन लाइसेंसधारकों की गतिविधियों की कोई निगरानी नहीं होती?
बाहरी राज्यों और नेपाल की लड़कियों की संलिप्तता
जानकार सूत्रों के अनुसार, कई स्पा सेंटरों में नेपाल और अन्य राज्यों की युवतियाँ कार्यरत हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि न तो इनके नाम संबंधित थानों में दर्ज हैं और न ही मकान मालिकों या सेंटर संचालकों द्वारा पुलिस को कोई सूचना दी जाती है, जो कि नियमानुसार अनिवार्य है।
कंप्लीमेंट के नाम पर शराब, और ‘तीसरी आंख’ से निगरानी
सूत्रों का दावा है कि कई स्पा सेंटर ग्राहकों को संतुष्ट करने के लिए महंगी शराब तक ‘कंप्लीमेंट’ के तौर पर परोसते हैं। साथ ही, बाहरी सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है ताकि अंदर चल रही गतिविधियाँ रिकॉर्ड न हो सकें। इससे छापे की स्थिति में सबूत जुटाना और कठिन हो जाता है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के अनुसार भारत में हर वर्ष औसतन 2000 से अधिक अनैतिक देह व्यापार के मामले दर्ज होते हैं। वहीं, मध्यप्रदेश में विशेष रूप से भोपाल, इंदौर और जबलपुर जैसे शहरों में स्पा सेंटरों की आड़ में चल रही गतिविधियों पर पुलिस की कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ है कि यह धंधा अब केवल गुप्त नहीं रह गया। वर्ष 2023 में जबलपुर में भी करीब आधा दर्जन छापों में ऐसे ही रैकेट का पर्दाफाश हुआ, जिससे सवाल उठता है कि बाकी बचे स्पा सेंटरों की जांच अब तक क्यों नहीं हुई?"
भोपाल जैसी कार्रवाई जबलपुर में कब?
पिछले साल भोपाल में स्पा की आड़ में चल रहे रैकेट पर पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की थी। नतीजतन, वहां इस गोरखधंधे में कमी देखी गई। जबलपुर में भी ऐसी कठोर कार्रवाई की ज़रूरत महसूस की जा रही है, जिससे इस तरह के अवैध धंधे पर अंकुश लगाया जा सके।
अधिकारियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में
जब संबंधित अधिकारियों से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया मांगी जाती है, तो या तो वे गोलमोल जवाब देते हैं या स्पष्ट जानकारी देने से कतराते हैं। यह रवैया भी संदेह को जन्म देता है कि कहीं यह चुप्पी किसी मिलीभगत का संकेत तो नहीं?
आपत्तिजनक सामग्री की बरामदगी की संभावना
यदि प्रशासन और पुलिस नियमित रूप से इन स्पा सेंटरों की जांच करें, तो वहां से आपत्तिजनक सामग्री—जैसे सेक्स उत्तेजक दवाइयां, प्रतिबंधित वस्तुएं और अन्य आपराधिक सामग्री—भी बरामद हो सकती हैं।

No comments:
Post a Comment