जब रिश्ते शर्मसार हो गए: एक चाची भतीजे के साथ भागी, दूसरी ने मंदिर में रचाई शादी" - Pratham Today, Sach Ki Baat SabKe Saath -->

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Tuesday, June 24, 2025

जब रिश्ते शर्मसार हो गए: एक चाची भतीजे के साथ भागी, दूसरी ने मंदिर में रचाई शादी"

 


 क्रिएटर (यूपी) और जमुई (बिहार)

 24 जून 2025 | प्रथम विशेष रिपोर्ट

 कलंकित हो रहे भिन्न, टूटती सीमाएँ

समाज में पहलवानों की बहादुरी जा रही है। कभी सबसे पवित्र माने जाने वाले मां, चाची, बहू, बेटी जैसी बातें अब कुछ कहानियों में सामाजिक प्रतिबंधों को तोड़ते नजर आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के क्रिस्टल और बिहार के जमुई से हाल ही में सामने आई दो कहानियों ने इस बात को और प्रमाणित किया है कि रिश्तों में दोस्ती की जगह अब प्यार और इरादे ले ली गई है।

 केस 1: क्रिएटर - राक्षस के प्यार में पैट-चाटी, दो बच्चों को लेकर इब्राहिम

क्रिस्टोफर के हरदुआगंज थाना क्षेत्र में एक महिला अपने ही साधु प्रेमी के साथ हो गई। परिवार का आरोप है कि पति और महिला के बीच अवैध संबंध थे, जिसमें 11 साल की बेटी की भी हालत देखी गई। कई बार डॉक्यूमेंट्री के बाद भी दोनों नहीं माने और एक दिन की महिला ने अपने दो बच्चों को लेकर स्टॉक शेयर किया।

पहले पुलिस ने उन्हें दिल्ली से बरामद किया था, हाल ही में दोनों लापता हो गए थे। महिला के पति ने बताया कि क्रिस्टोफर ने उसे खतरनाक बना दिया था, जिससे उसका राजवंश ही खत्म हो जाएगा। मामला अब भी पुलिस जांच के दायरे में है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।


 केस 2: जमुई (बिहार) - पति की गर्लफ्रेंड से कराई शादी, तीन साल की बेटी को छोड़ा

बिहार के जमुई जिले में 24 साल की आयुषी कुमारी ने अपने पति और तीन साल की बेटी को ठीक कर लिया, पति के ही भाई-बहन से गांव के मंदिर में शादी कर ली। एक साल से दोनों में प्रेम प्रसंग चल रहा था। तलाक की प्रक्रिया अभी पूरी तरह से नहीं हुई थी कि दोनों घर से अलग हो गए और कुछ दिन बाद वापस मंदिर में आकर शादी कर ली।

आयुषी ने साफा से कहा कि वह अब सचिन के साथ ही जीवन साथी और बेटी की जिम्मेदारी अपने बायोलॉजिकल पिता (पहले पति) पर रहेंगी। पूर्व पति ने भी अब कोई दोस्त नहीं खोजा है।

 प्रेम, स्वतंत्रता या सामाजिक ढाँचे के टूटने की प्रवृत्ति?

एक तरफ जहां ये घटनाएं "स्वतंत्र सोच", "व्यक्तिगत पसंद" और "प्यार" के नाम पर हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ परिवार, बच्चे और सामाजिक संतुलन पर बुरा असर पड़ रहा है। बच्चों पर मनोविज्ञान का असर, भाईचारे में अंधविश्वास और समाज में अविश्वास जैसे रिश्ते जन्म ले रही हैं।

 प्रथम कथन का कथन 

अन्यत्र केवल खून से निर्मित नहीं है, उन्हें विश्वास और प्रतिबंध की अनुमति है। समाज में ऐसे मामले जहां "प्रेम की आजादी" के नाम पर "संस्कारों की हत्या" हो रही है, उन पर चर्चा, वकालत और कार्रवाई की कोशिश की जाती है।

 प्रथम – सच की बात, सबके साथ।








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