हार्ट इंफिनिटी अस्पताल पर फिर उठे सवाल, आयुष्मान योजना के तहत इलाज में अनियमितता और अभद्रता के आरोप
प्रथम टुडे जबलपुर।
शहर के एक निजी अस्पताल हार्ट इंफिनिटी हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। युवा कांग्रेस ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि आयुष्मान योजना जैसे शासकीय योजनाओं के बावजूद मरीजों से जबरन पैसे वसूले जा रहे हैं और सवाल उठाने पर उनके साथ बदसलूकी की जाती है।
युवा कांग्रेस अध्यक्ष एड. विजय रजक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि 14 जून को पनागर निवासी एक मरीज को सीने में दर्द की शिकायत पर हार्ट इंफिनिटी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन की बात कही और आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क इलाज की मांग पर अस्पताल प्रबंधन ने कथित रूप से 20 हजार रुपये अतिरिक्त की मांग की। परिजनों के विरोध के बाद ऑपरेशन तो मुफ्त किया गया लेकिन गंभीर ऑपरेशन के बावजूद मरीज को 24 घंटे के भीतर डिस्चार्ज कर दिया गया।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मरीज की तबीयत दोबारा बिगड़ी और उन्हें पुनः अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस बार जब परिजनों ने डॉक्टर अंकित अग्रवाल से सवाल किया तो अस्पताल प्रबंधन ने कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया और बाउंसर बुलाकर परिजनों को बाहर निकाल दिया। इस घटनाक्रम में युवा कांग्रेस नेताओं, अधिवक्ताओं और अस्पताल स्टाफ के बीच तीखी झड़प हुई। स्थिति को देखते हुए ओमती पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
इस मामले में थाना प्रभारी ओमती का कहना है कि दोनों पक्षों की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। युवक कांग्रेस अध्यक्ष विजय रजक द्वारा भी आवेदन दिया गया है जिसकी विवेचना चल रही है।
दूसरी ओर, अस्पताल संचालक डॉ. अंकित अग्रवाल ने सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंपा है, जिसमें कुछ युवकों द्वारा अस्पताल स्टाफ के साथ कथित हाथापाई होते देखे जा सकते हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इसे गुंडागर्दी करार देते हुए पुलिस में शिकायत की है।
गौरतलब है कि हार्ट इंफिनिटी हॉस्पिटल इससे पहले भी कई बार विवादों में रह चुका है। मरीजों और उनके परिजनों के साथ व्यवहार, इलाज के नाम पर दबाव और अतिरिक्त पैसों की मांग जैसे आरोप पहले भी लग चुके हैं, जिनमें पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा है।
युवा कांग्रेस ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ऐसी निजी स्वास्थ्य संस्थाओं की गहन जांच हो और शासकीय योजनाओं का दुरुपयोग करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

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