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Tuesday, May 27, 2025

TRFA योजना में बड़ा घोटाला: डिंडौरी में चना-मसूर बीज वितरण में 30 लाख से अधिक की फर्जीवाड़ा, EOW ने की तीन अफसरों पर FIR



 [27/5, 16:56] Anurag Dixit:

 प्रथम टुडे जबलपुर  :--  जिले में किसानों की भलाई के लिए चलाई जा रही TRFA योजना (Targeting Rice Fallow Area Scheme) में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में सामने आया है कि कृषि विभाग के अधिकारियों ने फर्जी किसानों के नाम पर बीज वितरण दिखा कर शासन को 30.39 लाख रुपए का चूना लगाया। यह घोटाला वर्ष 2021–22 में हुआ, जिसमें चना और मसूर बीज वितरण के नाम पर कागज़ी आंकड़ों के सहारे धन का दुरुपयोग किया गया।

 TRFA योजना क्या है?

TRFA योजना का उद्देश्य रबी मौसम में उन खेतों को कृषि उत्पादन में लाना है, जो खरीफ के मौसम में चावल की खेती के बाद खाली छोड़ दिए जाते हैं। इस योजना के तहत सरकार किसानों को अनुदान पर चना, मसूर जैसे रबी फसलों के बीज उपलब्ध कराती है, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो और कृषि भूमि का अधिकतम उपयोग हो सके।

क्या है पूरा मामला?

2021-22 में डिंडौरी जिले में कृषि विभाग द्वारा किसानों को चना और मसूर बीज वितरण किया गया। जांच में पाया गया कि अधिकारियों ने बड़ी संख्या में फर्जी किसानों की सूची तैयार की, जिनके नाम पर कागजों में बीज बांटे गए, लेकिन वास्तव में न तो बीज वितरण हुआ और न ही वे किसान असल में मौजूद थे।

372 फर्जी किसानों को 276.75 क्विंटल चना बीज वितरण दिखाया गया।

295 फर्जी किसानों को 118 क्विंटल मसूर बीज का वितरण दर्शाया गया।

जबकि वास्तविकता में

728 असली किसानों को 546 क्विंटल चना बीज मिला।

305 वास्तविक किसानों को 121.5 क्विंटल मसूर बीज वितरित किया गया।

 शिकायत और जांच में कैसे हुआ खुलासा?

एक जागरूक नागरिक की शिकायत के बाद EOW ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान 57 किसानों से बयान लिए गए और 12 पंचायतों में मौके पर सत्यापन (पंचनामा) कराया गया। इनमें से 36 किसानों ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें कोई बीज नहीं मिला।

ग्राम देवरगढ़ के मामले में विभागीय सूची में 64 किसानों को चना बीज दिए जाने का उल्लेख था, लेकिन जांच में पाया गया कि ये किसान उस गांव के निवासी ही नहीं थे।

 स्टॉक रजिस्टर से खुली पोल

जांच में यह भी पाया गया कि जिस बीज वितरण को कागजों में दर्शाया गया, वह बीज विभागीय गोदामों में कभी आया ही नहीं।

276.75 क्विंटल चना बीज – अनुमानित हानि ₹21.30 लाख118 क्विंटल मसूर बीज – अनुमानित हानि ₹9.08 लाख कुल सरकारी हानि: ₹30.39 लाख

 इन अधिकारियों पर दर्ज हुआ मामला

EOW ने तीन अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए केस दर्ज कर लिया है:

अश्विनी झारिया – तत्कालीन उप संचालक, किसान कल्याण एवं कृषि विभाग

इंदर लाल गौरिया – तत्कालीन शाखा प्रभारी (सेवानिवृत्त)

हेमंत मरावी – वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, विकासखंड मेंहदवानी

इन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएं:

120B (षड्यंत्र)409 (आपराधिक विश्वासघात)420 (धोखाधड़ी)467, 468, 471 (जालसाजी)त तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धाराएं:

7C, 13(1)(B), 13(2) (संशोधित 2018) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की विस्तृत विवेचना अभी भी जारी है।

क्या कहता है यह घोटाला?

इस घोटाले ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और ज़मीनी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन योजनाओं का उद्देश्य किसानों की मदद करना है, वहीं योजनाएं कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की जेब भरने का साधन बन गईं। इससे न केवल शासन की छवि धूमिल हुई है, बल्कि किसानों का भरोसा भी डगमगाया है। आगे की कार्रवाई क्या होगी?

सूत्रों के अनुसार, EOW अब इस बात की जांच कर रही है कि बीज वितरण के समय उच्च अधिकारियों या राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल तो नहीं हुआ। साथ ही, इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि जिले के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के और घोटाले सामने आ सकते हैं।

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