MP के जबलपुर में 7 साल तक फर्जी डॉक्टर बना रहा युवक, दोस्त की पहचान का किया था इस्तेमाल, मौत से हुआ खुलासा
प्रथमटुडे डिजिटल डेस्क | 25 मई 2025
मध्यप्रदेश के जबलपुर से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जो फिल्मी कहानी जैसा लगता है लेकिन सच्चाई में घटित हुआ है। एक युवक ने अपने दोस्त की पहचान का इस्तेमाल कर MBBS की पढ़ाई पूरी की और सात साल तक डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज करता रहा। साजिश तब सामने आई जब एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने लापरवाही की शिकायत की।
सतेंद्र कुमार और उसका दोस्त बृजराज सिंह
पूरा मामला तब उजागर हुआ जब रेलवे ऑफिसर्स कॉलोनी निवासी मनोज कुमार महावर ने सितंबर 2024 में अपनी मां की मौत पर निजी अस्पताल के खिलाफ लापरवाही की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनकी मां को 1 सितंबर को भंवरताल स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 2 सितंबर को उनकी मौत हो गई। मेडिकल फाइलों की जांच में सामने आया कि ICU में उस रात ‘डॉ. बृजराज सिंह उइके’ ड्यूटी पर थे।
शुरू हुई जांच और हुआ पर्दाफाश
पुलिस जब डॉक्टर की पृष्ठभूमि खंगालने लगी, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जिस व्यक्ति के नाम पर डिग्री थी, असल में वह जबलपुर में पेंटिंग का काम करता है और डॉक्टर से उसका कोई वास्ता नहीं है। जब पुलिस ने वास्तविक बृजराज सिंह उइके को कथित डॉक्टर की तस्वीर दिखाई, तो उन्होंने तुरंत पहचान लिया, "यह तो मेरा दोस्त सतेंद्र है!"
शहर के ओमती थाना क्षेत्र के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुर्यकांत शर्मा के अनुसार, सतेंद्र कुमार नामक युवक ने अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले अपने दोस्त बृजराज सिंह उइके की पहचान और जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करके नेताजी सुभाष चंद्र मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। उसने 2018 में MBBS की पढ़ाई पूरी की और फिर एक निजी अस्पताल में नौकरी करने लगा।
एक दोस्त डॉक्टर बना, दूसरा दीवारें रंगता रहा
जहां सतेंद्र कुमार अस्पताल में डॉक्टर बनकर लोगों का इलाज कर रहा था, वहीं असली बृजराज सिंह उइके दीवारों की पेंटिंग करके अपनी आजीविका चला रहा था। इस पूरे मामले से सवाल उठते हैं कि इतनी बड़ी धोखाधड़ी आखिर इतनी देर तक सिस्टम की नजरों से कैसे बची रही।
पुलिस कर रही है गहन जांच
फिलहाल सतेंद्र कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि सतेंद्र ने कैसे फर्जी दस्तावेजों के जरिए आरक्षण का लाभ उठाया और मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया।

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