जबलपुर। बरगी डैम हादसे के बाद अब सुरक्षा व्यवस्थाओं की कलई खुलती नजर आ रही है। संजय यादव का कहना है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि अधिकारियों की अनदेखी का परिणाम है। उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।
1. जिला पंचायत सीईओ की भूमिका पर सवाल
संजय यादव ने एक वीडियो जारी कर खुलासा किया कि 10 अप्रैल को जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत द्वारा एक सामान्य सभा की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा 'मध्य प्रदेश मत्स्य उद्योग नीति' था। यादव का आरोप है कि नीति और नियमों पर चर्चा तो हुई, लेकिन सुरक्षा मानकों (Safety Standards) को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
2. जिलहरी घाट का कड़वा सच: बच्चों के हाथ में नाव की कमान?
हादसे के बाद संजय यादव ने खुद जिलहरी घाट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं:
- प्रशिक्षण में लापरवाही: घाट पर छोटे बच्चों को नाव चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही थी, जो कि सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है।
- सुरक्षा उपकरणों का अभाव: नाविकों के पास न तो लाइफ जैकेट थे और न ही आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए अन्य उपकरण।
- रजिस्ट्रेशन का मुद्दा: नाविकों के पंजीयन और उनकी पात्रता को लेकर भी कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं दिखाई दी।
3. पुरानी मांगों की अनदेखी: नगर निगम की चुप्पी
यह पहली बार नहीं है जब जिलहरी घाट की सुरक्षा पर सवाल उठे हों। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेश सोनकर ने अपने कार्यकाल के दौरान नगर निगम में कई बार यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने विशेष रूप से नाविकों के लिए लाइफ जैकेट और सुरक्षा किट उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन कागजी कार्रवाई के आगे जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदला।
4. "अधिकारियों पर हो FIR" – कांग्रेस की कड़ी चेतावनी
संजय यादव ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस लापरवाही की कीमत आम जनता अपनी जान देकर चुका रही है। उन्होंने मांग की है कि:
- जिन अधिकारियों की देखरेख में सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
- सभी घाटों और डैम क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से सुरक्षा मानकों का ऑडिट हो।

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