प्रथम टुडे विशेष: जबलपुर में 'ओवररेटिंग' के पुराने खेल पर फिर शुरू हुआ बवाल, क्या ठंडे बस्ते में चले गए पूर्व कलेक्टर के कड़े सबक? - Pratham Today, Sach Ki Baat SabKe Saath -->

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Friday, May 1, 2026

प्रथम टुडे विशेष: जबलपुर में 'ओवररेटिंग' के पुराने खेल पर फिर शुरू हुआ बवाल, क्या ठंडे बस्ते में चले गए पूर्व कलेक्टर के कड़े सबक?

 

जबलपुरमें कलेक्टर रहे दीपक सक्सेना ने एक बार फिर आबकारी कमिश्नर बनते ही, शराब माफियाओं पर फिर शिकंजा कसने की तैयारी कर दी ह


जबलपुर। संस्कारधानी में शराब सिंडिकेट और आबकारी विभाग की जुगलबंदी एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रदेशव्यापी 10 दिवसीय विशेष जांच अभियान के बीच जबलपुर में नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ रही हैं। जहाँ एक ओर मुख्यालय सख्त कार्रवाई के निर्देश दे रहा है, वहीं जबलपुर में सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने तात्कालिक कलेक्टर दीपक सक्सेना के उस ऐतिहासिक 'सर्जिकल स्ट्राइक' की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने शराब माफिया की कमर तोड़ दी थी।

जब पटवारी बने थे 'कस्टमर': वह ऐतिहासिक गोपनीय ऑपरेशन

​जबलपुर में ओवररेटिंग का खेल नया नहीं है, लेकिन इस पर सबसे बड़ा प्रहार तात्कालिक कलेक्टर दीपक सक्सेना ने किया था। उन्होंने आबकारी विभाग पर भरोसा करने के बजाय राजस्व विभाग के पटवारियों की 40 से अधिक टीमें गठित की थीं।

  • गोपनीय रणनीति: इन पटवारियों को आम ग्राहक बनाकर शहर की विभिन्न शराब दुकानों पर भेजा गया था।
  • पुख्ता सबूत: उन्हें निर्देश दिए गए थे कि वे अलग-अलग ब्रांड की शराब खरीदें और ऑनलाइन भुगतान करें, ताकि अवैध वसूली का डिजिटल और पुख्ता रिकॉर्ड शासन के पास रहे।
  • बड़ा खुलासा: इस गोपनीय ऑपरेशन में रांझी, गोरखपुर और अधारताल जैसे क्षेत्रों की 22 दुकानों की जांच हुई, जिसमें से 21 दुकानों पर ₹20 से लेकर ₹150 तक की ओवररेटिंग पकड़ी गई थी। उस समय न तो दुकानों पर रेट लिस्ट थी और न ही बिल दिए जा रहे थे।

वर्तमान स्थिति: क्या प्रशासन भूल गया पुराना सबक?

​दीपक सक्सेना द्वारा शासन को सौंपी गई उस रिपोर्ट के बाद उम्मीद थी कि जबलपुर में व्यवस्था सुधरेगी, लेकिन वर्तमान में सहायक आबकारी आयुक्त के नेतृत्व में विभाग फिर उसी ढर्रे पर लौट आया है।

  • नया अभियान, पुरानी लापरवाही: 28 अप्रैल से 7 मई तक चलने वाले वर्तमान विशेष अभियान में भोपाल-इंदौर तो सक्रिय हैं, लेकिन जबलपुर में आबकारी उड़नदस्ते मौन हैं।
  • महंगी मदिरा, मनमाने दाम: वर्तमान में देशी शराब पर ₹20 और अंग्रेजी ब्रांड्स व बीयर पर ₹50 से ₹100 तक की अतिरिक्त वसूली धड़ल्ले से जारी है।

क्यूआर कोड बना 'शो-पीस'

​पारदर्शिता के लिए अनिवार्य किया गया क्यूआर कोड सिस्टम जबलपुर में महज एक दिखावा बनकर रह गया है। पूर्व में कलेक्टर की सख्ती से जो डर पैदा हुआ था, वह अब पूरी तरह समाप्त नजर आता है। दुकानों से रेट लिस्ट गायब है और ग्राहक आज भी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

लोकायुक्त जांच की बढ़ती मांग

​जिस तरह दीपक सक्सेना ने पटवारियों के जरिए आबकारी विभाग की पोल खोली थी, वैसी ही किसी निष्पक्ष जांच की मांग अब फिर से उठने लगी है। जानकारों का कहना है कि यदि स्थानीय आबकारी अधिकारी इन अनियमितताओं को नहीं रोक पा रहे हैं, तो मामले को लोकायुक्त या आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप देना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस संगठित भ्रष्टाचार के पीछे असली सूत्रधार कौन है।

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