सदन की गहमागहमी: ‘नारी शक्ति वंदन’ प्रस्ताव बहुमत से पारित, भाजपा पार्षदों ने भी किया सफाई ठेके का विरोध
जबलपुर | नगर निगम सदन की बैठक इस बार हंगामे, राजनीतिक दांव-पेंच और अप्रत्याशित फैसलों के नाम रही। जहाँ एक ओर सत्ता पक्ष ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर बाजी मारी, वहीं सफाई व्यवस्था से जुड़े विवादित 'प्रस्ताव क्रमांक 18' को भारी विरोध के बाद महापौर को वापस लेना पड़ा। इस पूरी कार्यवाही के दौरान सदन में कांग्रेस पार्षदों की बेहद कम मौजूदगी शहर के गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही।
सफाई ठेका प्रस्ताव पर अपनों ने ही घेरा, महापौर ने खींचे हाथ
सदन में सबसे तीखी बहस सफाई ठेके के प्रस्ताव को लेकर हुई। दिलचस्प बात यह रही कि इस प्रस्ताव का विरोध केवल विपक्ष ने ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के पार्षद महेश राजपूत और अतुल दानी ने भी पुरजोर तरीके से किया। पार्षदों का तर्क था कि शहर की सफाई व्यवस्था पहले से ही बदहाल है और ठेकेदारों की मनमानी बढ़ रही है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्षद वर्तमान 10% से 20% पेनल्टी व्यवस्था को ही बरकरार रखना चाहते थे। बढ़ते विरोध को देखते हुए महापौर बहादुर सिंह अन्नू ने प्रस्ताव वापस लेने की घोषणा की।
"सत्ता पक्ष के कुछ पार्षद इस प्रस्ताव से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। उनकी भावनाओं और शहर के व्यापक हित को देखते हुए हमने इसे वापस लेने का निर्णय लिया है।" > — बहादुर सिंह अन्नू, महापौर
'नारी शक्ति वंदन' पर छिड़ा घमासान, फिर भी लगा ठप्पा
सदन में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के समर्थन में प्रस्ताव पेश किया गया। भाजपा ने इसे ऐतिहासिक बताया, जबकि कांग्रेस पार्षदों ने जनगणना और परिसीमन का मुद्दा उठाकर इसे समय से पूर्व बताया। भारी नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच इस प्रस्ताव को बहुमत से पारित कर दिया गया।
चर्चा में रही कांग्रेस की 'खाली कुर्सियां'
नगर निगम के इस महत्वपूर्ण सत्र में कांग्रेस पार्षद दल की रणनीति पर सवालिया निशान लग गए हैं। सदन में कांग्रेस के कुल 29 पार्षद हैं, लेकिन बैठक के दौरान मुट्ठी भर पार्षद ही उपस्थित नजर आए। इसके विपरीत सत्ता पक्ष की उपस्थिति शत-प्रतिशत के करीब रही। राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी या आंतरिक खींचतान के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि जिस मुद्दे पर पार्टी विरोध कर रही थी, वहां संख्या बल न होना उसकी स्थिति को कमजोर कर गया।
वार-पलटवार: किसने क्या कहा?
- अमरीश मिश्रा (नेता प्रतिपक्ष): "हम डेढ़ साल से इस जनविरोधी प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। अगर यह पास होता तो सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती।"
- अयोध्या तिवारी (कांग्रेस पार्षद): "ठेकेदार पहले से ही लाभ ले रहे हैं। यह प्रस्ताव जनता के टैक्स की खुली बर्बादी की कोशिश थी।"

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