पार्षद कविता रैकवार का ओबीसी जाति प्रमाण पत्र निरस्त, सदस्यता पर संकट
जबलपुर नगर निगम के हनुमानताल वार्ड की पार्षद कविता रैकवार के खिलाफ बड़ा फैसला सामने आया है। पिछड़ा वर्ग उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने उनका ओबीसी जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाते हुए निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कविता रैकवार ने सामान्य वर्ग से होने के बावजूद उपनाम बदलकर ओबीसी का जाति प्रमाण पत्र बनवाया और उसी आधार पर भाजपा से पार्षद का चुनाव लड़ा और जीता।
शिकायत से शुरू हुआ पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, कांग्रेस नेता राजेन्द्र सराफ ने कविता रैकवार के जाति प्रमाण पत्र को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि पार्षद कविता रैकवार वास्तविक रूप से ओबीसी वर्ग से नहीं हैं, बल्कि सामान्य वर्ग की हैं, लेकिन उन्होंने एसडीएम कार्यालय से गलत जानकारी देकर ओबीसी जाति प्रमाण पत्र बनवा लिया।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने वर्ष 2022 में प्रकरण को पिछड़ा वर्ग उच्च स्तरीय छानबीन समिति को भेज दिया था। इसके बाद समिति ने वर्ष 2023 में जांच कर कविता रैकवार का जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाते हुए निरस्त कर दिया था।
आदेश पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका
बताया जा रहा है कि समिति के निर्णय के बाद भी संबंधित आदेशों का पालन नहीं हुआ, जिस पर याचिकाकर्ता राजेन्द्र सराफ ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने एक बार फिर प्रकरण को छानबीन समिति को भेज दिया।
विजिलेंस, कलेक्टर और एसपी से कराई गई जांच
हाईकोर्ट के निर्देश पर पिछड़ा वर्ग उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने विस्तृत जांच के लिए विजिलेंस, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को जांच के निर्देश दिए। तीनों एजेंसियों ने अलग-अलग जांच कर अपनी रिपोर्ट समिति को सौंपी।
इन रिपोर्टों के आधार पर समिति ने पाया कि कविता रैकवार का ओबीसी जाति प्रमाण पत्र गलत जानकारी के आधार पर जारी किया गया था। इसके बाद समिति ने प्रमाण पत्र को निरस्त करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया।
अब आगे क्या हो सकता है
मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम के तहत संभावित कार्रवाई
इस मामले में अब मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम के तहत कई कार्रवाई संभव मानी जा रही है —
1. पार्षद पद स्वतः रिक्त हो सकता है
यदि पार्षद ने आरक्षित (ओबीसी) सीट से चुनाव जीता है और उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त हो गया है, तो:
पार्षद पद अयोग्यता के कारण स्वतः समाप्त माना जा सकता है
निर्वाचन अमान्य घोषित किया जा सकता है
2. नगर निगम आयुक्त / कलेक्टर को सूचना
छानबीन समिति के आदेश के बाद:
आदेश नगर निगम आयुक्त को भेजा जाएगा
आयुक्त द्वारा निर्वाचन अधिकारी को जानकारी दी जाएगी
इसके बाद पार्षद पद रिक्त घोषित किया जा सकता है
3. उपचुनाव की प्रक्रिया
यदि सीट रिक्त घोषित होती है:
राज्य निर्वाचन आयोग उपचुनाव की घोषणा करेगा
उसी वार्ड में पुनः चुनाव कराया जाएगा
4. आपराधिक मामला भी दर्ज हो सकता है
यदि जांच में प्रमाण पत्र फर्जी बनवाने की पुष्टि होती है तो:
धोखाधड़ी
गलत दस्तावेज प्रस्तुत करना
शासकीय दस्तावेज में हेराफेरी
जैसी धाराओं में एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है।
5. भविष्य के चुनाव लड़ने पर रोक
यदि फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव जीतने की पुष्टि होती है तो:
संबंधित पार्षद को भविष्य में चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जा सकता है
यह निर्णय निर्वाचन आयोग या न्यायालय के आदेश पर निर्भर करेगा
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निगम और स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों के नेताओं की नजर अब इस पर टिकी है कि प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है।
वहीं कांग्रेस नेता राजेन्द्र सराफ ने इसे सत्य की जीत बताया है, जबकि भाजपा की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
अब सभी की नजर इस बात पर है कि:
नगर निगम प्रशासन कब सीट रिक्त घोषित करता है
राज्य निर्वाचन आयोग कब उपचुनाव की घोषणा करता है
और क्या इस मामले में आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी
यह मामला आने वाले दिनों में जबलपुर की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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