जबलपुर। शोभापुर पहाड़ी की कीमती जमीन और अवैध उत्खनन को लेकर मचा घमासान अब आर-पार की जंग में तब्दील हो गया है। सिंह परिवार द्वारा हाल ही में लगाए गए आरोपों पर चुप्पी तोड़ते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आर.के. सिंह सैनी ने कड़ा प्रहार किया है। सैनी ने दो टूक कहा कि यह पूरा विवाद 'भ्रष्टाचार बनाम कानून' का है। अवैध खनन पर हुए करोड़ों के जुर्माने ने विरोधी पक्ष की चूलें हिला दी हैं, जिसके चलते अब अनर्गल आरोप लगाकर प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
विवाद की असली जड़: ₹4.08 करोड़ का तगड़ा जुर्माना
अधिवक्ता सैनी ने दस्तावेजों के साथ खुलासा किया कि शोभापुर पहाड़ी पर बेखौफ होकर अवैध खनन और हरियाली की बलि दी जा रही थी। उन्होंने साक्ष्यों के साथ इसकी शिकायत शासन-प्रशासन से की थी।
"मेरी शिकायत पर राजस्व और खनिज विभाग ने जब संयुक्त जांच की, तो बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन पाया गया। इसी के आधार पर कलेक्टर न्यायालय ने संबंधित पक्ष पर 4 करोड़ 8 लाख रुपए का भारी-भरकम जुर्माना ठोंका है। इस बड़ी कार्रवाई से बौखलाकर ही अब मुझ पर झूठे आरोप मढ़े जा रहे हैं।"
— आर.के. सिंह सैनी, अधिवक्ता
दागदार है विरोधी पक्ष का दामन: कालोनाइजर पर 'चोरी' का मुकदमा
सैनी ने विरोधी पक्ष की साख पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि शोभापुर पहाड़ी पर कॉलोनी काटने वाले अभिलाष तिवारी का ट्रैक रिकॉर्ड साफ नहीं है।
- चोरी का केस: अभिलाष तिवारी पर रांझी थाने में धारा 379 (चोरी) के तहत अपराध पंजीबद्ध है। यह मामला 14 जुलाई 2022 को दर्ज हुआ था, जिसमें वह वर्तमान में जमानत पर है।
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जुर्माने की फेहरिस्त: केवल अभिलाष ही नहीं, बल्कि इस खेल में शामिल अन्य चेहरों पर भी प्रशासन का डंडा चला है।
- महेश सिंह: खनिज विभाग द्वारा 4 लाख 85 हजार और कलेक्टर द्वारा 50 लाख का जुर्माना।
- इसके अलावा नरेन्द्र सिंह, शोभना सिंह और रमेश सिंह पर भी दंडात्मक कार्रवाई की गई है।
"दबाव तंत्र" के आरोपों पर सैनी का बिंदुवार जवाब
प्रेस वार्ता में सैनी ने स्पष्ट किया कि उन पर लगाए गए 'कब्जा करने' के आरोप पूरी तरह निराधार और काल्पनिक हैं:
- पर्यावरण का संरक्षण: सैनी का तर्क है कि लड़ाई निजी जमीन की नहीं, बल्कि सरकारी पहाड़ी और पर्यावरण को बचाने की है।
- प्रशासनिक क्लीन चिट: जुर्माना प्रशासन ने जांच के बाद लगाया है, न कि किसी के दबाव में।
- निष्पक्ष जांच की चुनौती: एडवोकेट सैनी ने घोषणा की है कि वे किसी भी स्तर की उच्च स्तरीय जांच के लिए तैयार हैं, ताकि सच जनता के सामने आ सके।
क्या है दूसरी तरफ का पक्ष?
गौरतलब है कि पिछले दिनों सिंह परिवार ने मीडिया के माध्यम से अपनी पैतृक भूमि के अधिकारों की दुहाई दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी पुश्तैनी जमीन पर कब्जे की नीयत से उन्हें कानूनी शिकंजे में फंसाया जा रहा है और बार-बार शिकायतें कर मानसिक व आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है।
अब प्रशासन की भूमिका पर टिकी नजरें
शोभापुर पहाड़ी का यह मामला अब महज दो गुटों की लड़ाई नहीं रह गया है। करोड़ों की सरकारी जमीन, अवैध खनन और चोरी के मुकदमों ने इसे एक हाई-प्रोफाइल कानूनी मामला बना दिया है। एक तरफ कलेक्टर कोर्ट का भारी जुर्माना है, तो दूसरी तरफ रसूखदारों की साख दांव पर है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस भू-माफिया और अवैध खनन के नेटवर्क पर आगे क्या कड़ी कार्रवाई करता है।

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