गिरफ्तारी के बाद पूर्णिमा वर्मा ने DGP व लोकायुक्त से की उच्चस्तरीय जांच की मांग
छिंदवाड़ा/भोपाल/जबलपुर,
छिंदवाड़ा में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाने वाली गुलाबी गैंग (म.प्र.) की कमांडर एवं सामाजिक कार्यकर्ता पूर्णिमा वर्मा के खिलाफ दर्ज प्रकरण और उनकी गिरफ्तारी अब सवालों के घेरे में आ गई है। मामले को लेकर पूर्णिमा वर्मा ने मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, वहीं लोकायुक्त में भी शिकायत दर्ज कराई है।
6–7 अवैध शराब आहातों की की थी शिकायत
पूर्णिमा वर्मा के अनुसार, वे लंबे समय से शहर में संचालित 6 से 7 अवैध शराब के आहातों और दुकानों के खिलाफ शिकायतें कर रही थीं। उनका आरोप है कि अवैध शराब कारोबार के खिलाफ उनकी सक्रियता के कारण प्रभावशाली कारोबारियों के दबाव में पुलिस और राजस्व अधिकारियों द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
गिरफ्तारी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
अपने शिकायत पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि घटना की तारीख और गिरफ्तारी की तारीख में विरोधाभास है, जिससे पूरी कार्रवाई की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं। उनका कहना है कि पूर्व तैयार दस्तावेजों के आधार पर उन्हें प्रताड़ित किया गया और जेल भेजा गया। बाद में न्यायालय से राहत मिलने के बावजूद उन पर अनावश्यक कानूनी दबाव बनाए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
संरक्षण के आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
पूर्णिमा वर्मा ने यह भी आरोप लगाया है कि अवैध शराब कारोबार को संरक्षण देने के बदले संबंधित अधिकारियों द्वारा आर्थिक लाभ लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने इन गतिविधियों का विरोध किया तो उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया।
उन्होंने मांग की है कि संबंधित थाना प्रभारी और तहसीलदार की भूमिका की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की जाए।
लोकायुक्त में दर्ज कराए बयान
मामले को आगे बढ़ाते हुए पूर्णिमा वर्मा गुरुवार को अपने अधिवक्ता विवेक तिवारी के साथ जबलपुर पहुंचीं, जहां उन्होंने लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए और विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस मामले में संबंधित पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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