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Saturday, January 10, 2026

पुलिसकर्मी से दुर्व्यवहार मामले में हाईकोर्ट सख्त

 


जिस पुलिसकर्मी के साथ हुआ व्यवहार, उसी पर दर्ज हुई FIR; थाना प्रभारी तलब, SP व पूर्व महापौर प्रभात साहू को नोटिस

प्रथम टुडे | सच की बात सब के साथ

जबलपुर, 

जबलपुर में पुलिसकर्मी के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक दबाव से जुड़ा यह मामला अब न्यायालय की सख्त निगरानी में पहुँच गया है, जिसमें कोर्ट ने थाना प्रभारी, जबलपुर के पुलिस अधीक्षक और भाजपा के पूर्व महापौर प्रभात साहू को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

क्या है मामला: हेलमेट चेकिंग रोकने पर विवाद शुरू हुआ

मामला सितंबर 2025 का है। 18 सितंबर को शहर में हेलमेट चेकिंग अभियान के दौरान एक पुलिसकर्मी ने नियम के तहत वाहन रोककर पूछताछ की थी। उसी दौरान भाजपा के पूर्व महापौर प्रभात साहू तथा कुछ समर्थकों के बीच कहासुनी बढ़ी और कथित तौर पर पुलिसकर्मी के साथ धक्का-मुक्की और गाली-गलौज की स्थिति बन गई। वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी की वर्दी फटने की बात भी सामने आई थी।

घटना के तुरंत बाद मौके पर कुछ राजनीतिक नेता और जनप्रतिनिधि पहुँचे, जिससे विवाद और बढ़ गया। उसी रात दबाव की परिस्थितियों में—जिस पुलिसकर्मी के साथ कथित दुर्व्यवहार हुआ—उसी के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर दी गई, जबकि नेताओं और समर्थकों के खिलाफ “अज्ञात आरोपियों” के नाम से मामला दर्ज किया गया।



पुलिसकर्मी की शिकायत में थे नाम, FIR फिर भी अज्ञात में

जानकारी के अनुसार, उक्त पुलिसकर्मी ने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से पूर्व महापौर तथा अन्य व्यक्तियों के नाम लिखे थे। इसके बावजूद थाना स्तर से दर्ज की गई FIR में किसी भी आरोपी का नाम शामिल नहीं किया गया।

यहीं से पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठने शुरू हुए, जिसकी शिकायत जबलपुर के अधिवक्ता मोहित वर्मा ने जनहित याचिका के रूप में हाईकोर्ट में की।

हाईकोर्ट ने कहा—पुलिसकर्मी भी कानून के दायरे में सुरक्षित

चीफ जस्टिस संजय सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि—

पुलिसकर्मी भी कानून के अंतर्गत संरक्षित नागरिक हैं।

ड्यूटी के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें गंभीरता से देखी जानी चाहिए।

FIR दर्ज करते समय आरोपी की पहचान स्पष्ट होने पर “अज्ञात” लिखना उचित नहीं।

कोर्ट ने दोनों FIR की केस डायरी तलब कर ली है और स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में लॉर्डगंज थाना प्रभारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे।

SP जबलपुर और पूर्व महापौर प्रभात साहू को नोटिस

याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने—

जबलपुर पुलिस अधीक्षक (SP)

लॉर्डगंज थाना प्रभारी

पूर्व महापौर प्रभात साहू

को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।

अदालत ने कहा कि वह इस बात की जाँच करेगी कि FIR दर्ज करने की प्रक्रिया में कहीं निष्पक्षता, पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों का पालन सही तरीके से हुआ या नहीं।

हाईकोर्ट की सख्ती से बढ़ सकती हैं राजनीतिक मुश्किलें

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि

हाईकोर्ट की इस प्रारंभिक प्रतिक्रिया से यह संकेत मिल रहा है कि न्यायालय इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से देख रहा है और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।

हालाँकि अभी तक कोर्ट द्वारा किसी भी आरोपी के खिलाफ दोष निर्धारण जैसा कोई प्रत्यक्ष आदेश जारी नहीं किया गया है, मगर नोटिस जारी होना और केस डायरी तलब होना अपने-आप में एक महत्वपूर्ण न्यायिक कदम है।

आगे क्या?

अगली सुनवाई में—

थाना प्रभारी को अदालत में पेश होकर FIR दर्ज करने की प्रक्रिया स्पष्ट करनी होगी।

केस डायरी से यह पता चलेगा कि पुलिस ने जांच किस दिशा में की।

सभी पक्षों के जवाब के बाद ही कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा।

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