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Tuesday, January 27, 2026

सेहत की कुर्सी, गंदा किचन! एमआईसी स्वास्थ्य सदस्य से जुड़े इंदौर सेव भंडार पर कार्रवाई, रिपोर्ट दबने का डर

 


इंदौर सेव भंडार के किचन में गंदगी का अंबार, चलित कोर्ट ने ठोका जुर्माना

सैंपल रिपोर्ट पर सवाल: क्या रसूख के आगे झुक जाएगा सिस्टम?

प्रथम टुडे 

जबलपुर।स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान 2026 के बीच जब नगर निगम की चलित कोर्ट ने शहर के नामी ब्रांड इंदौर सेव भंडार के किचन का दरवाजा खोला, तो अंदर का नज़ारा चौंकाने वाला था। बाहर से चमचमाता फ्रंट, आकर्षक लाइटिंग और ब्रांडिंग—लेकिन भीतर जमी हुई गंदगी, संदिग्ध खाद्य सामग्री और स्वच्छता मानकों की खुली अवहेलना।

संभाग क्रमांक 13 में आयोजित चलित कोर्ट की कार्रवाई में मजिस्ट्रेट अरुण गोयल की मौजूदगी में रेस्टोरेंट पर 8 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। निरीक्षण के दौरान नगर निगम के विधि अधिकारी राजीव अनभोरे, मुख्य स्वच्छता निरीक्षक संदीप पटेल, सीएसआई, पुलिस प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

किचन में क्या मिला?

अधिकारियों के मुताबिक—

किचन में घोर गंदगी

खाद्य सामग्री का अवैज्ञानिक व असुरक्षित भंडारण

सफाई व्यवस्था का पूरी तरह अभाव

मिठाइयों व नमकीन में संदेहास्पद स्थिति

24 जनवरी को लिए गए सैंपल, अब निगाहें रिपोर्ट पर

24 जनवरी को खाद्य विभाग द्वारा मिठाई और नमकीन के सैंपल लिए गए थे। अब सबसे बड़ा सवाल यह है—

क्या जांच रिपोर्ट निष्पक्ष आएगी या रसूख के आगे सिस्टम फिर झुक जाएगा?

शहर में यह चर्चा तेज है कि कहीं ऐसा न हो कि प्रभाव और राजनीतिक दबाव के चलते रिपोर्ट में लीपापोती कर दी जाए।

रसूख का सवाल क्यों उठ रहा है?

इंदौर सेव भंडार के संचालक कैलाश साहू को भाजपा का वरिष्ठ नेता बताया जाता है। उनकी पत्नी श्रीमती रजनी साहू नगर निगम में पार्षद होने के साथ-साथ एमआईसी सदस्य हैं—और अहम बात यह कि वे स्वास्थ्य विभाग की एमआईसी सदस्य भी हैं, जिसके अंतर्गत खाद्य सुरक्षा से जुड़े विषय आते हैं।

इसी कारण लोग सवाल कर रहे हैं—

“जिस एमआईसी सदस्य के जिम्मे शहर की सेहत है, उसी के प्रतिष्ठान में इतनी गंभीर गड़बड़ी कैसे?”

पहले भी उठे सवाल, लेकिन…

सूत्र बताते हैं कि इससे पहले भी इंदौर सेव भंडार पर कई बार कार्रवाई हुई, लेकिन कोई प्रभावी परिणाम सामने नहीं आया।

यहां तक कि एक बार स्टेशन क्षेत्र में यूपी से आई नकली मिल्क केक मिठाई पकड़े जाने का मामला भी सामने आ चुका है।

खाद्य विभाग का पक्ष

खाद्य विभागका कहना है कि—

“कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई है। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया।”

साथ ही अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में सिर्फ ब्रांड और नाम नहीं, बल्कि किचन की हकीकत देखी जाएगी।

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