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Friday, December 26, 2025

जबलपुर में अवैध ईंट भट्ठों का जाल, खनिज विभाग की चुप्पी पर सवाल


कुम्हार समाज की आड़ में करोड़ों की रॉयल्टी चोरी का आरोप**

प्रथम टुडे, जबलपुर।

जबलपुर जिले में अवैध ईंट भट्ठों और मिट्टी के अवैध उत्खनन का खेल अब खुलेआम चल रहा है। अब तक रेत माफिया की गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहा जबलपुर, अब अवैध ईंट भट्ठा माफिया का गढ़ बनता जा रहा है। ग्रामीण अंचलों में धड़ल्ले से चल रहे इन भट्ठों पर खनिज विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।

जिला प्रजापति कुम्भकार संघ (पंजीयन क्रमांक 894) ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वंशानुगत कुम्हार समाज को शासन द्वारा दी गई रॉयल्टी छूट का दुरुपयोग किया जा रहा है।

संघ के अनुसार, प्रजापति कुम्हार समाज की आड़ में अन्य जातियों के लोग अवैध रूप से ईंट निर्माण और मिट्टी उत्खनन कर रहे हैं, जिससे शासन को करोड़ों रुपये की रॉयल्टी और कर की चपत लग रही है, वहीं कुम्हार समाज का पारंपरिक व्यवसाय चौपट हो रहा है।

संघ ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन, खनिज साधन विभाग के 23 मार्च 1997 के आदेश के तहत वंशानुगत प्रमाणित कुम्हारों को परंपरागत रूप से ईंट, कबीला, बर्तन, दीया, मूर्ति आदि निर्माण के लिए गौण खनिज मिट्टी, रेत व भसुआ की रॉयल्टी से छूट दी गई है

इसके साथ ही भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 237 के अंतर्गत यह भी स्पष्ट निर्देश हैं कि शासकीय भूमि और सार्वजनिक स्थानों से कम से कम 50 मीटर की दूरी छोड़ना अनिवार्य है।

इसके बावजूद जिले के कई ग्रामीण इलाकों में बिना अनुमति, बिना पंजीयन और नियमों को ताक पर रखकर मिट्टी की खुदाई और ईंट निर्माण किया जा रहा है।

संघ का आरोप है कि जिला प्रजापति कुम्भकार संघ द्वारा जारी वैध प्रमाण पत्र के बिना ही ईंटों की बिक्री हो रही है, लेकिन खनिज विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।

इस पूरे मामले में खनिज विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब इस मुद्दे पर खनन अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो लगातार फोन करने के बावजूद उनका फोन नहीं उठाया गया, जिससे विभाग का पक्ष सामने नहीं आ सका।

जिला संघ ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध ईंट भट्ठों और अवैध मिट्टी उत्खनन पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरा प्रजापति कुम्हार समाज आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन-प्रशासन की होगी।

सूत्रों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो, तो करोड़ों रुपये की रॉयल्टी और अन्य कर की वसूली संभव है, लेकिन फिलहाल खनिज विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

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