जबलपुर (प्रथम टुडे)।
नगर निगम जबलपुर की सामान्य सभा की बैठक आज एक बार फिर विपक्ष और पक्ष के बीच टकराव का अखाड़ा बन गई। बैठक की शुरुआत भले ही शांतिपूर्ण रही हो, लेकिन जैसे ही कार्यवाही आगे बढ़ी, विपक्ष ने अन्य विषयों पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। नतीजतन बैठक को दो बार स्थगित करना पड़ा। हालांकि बाद में प्रस्तावों पर चर्चा के बाद बैठक को समाप्त किया गया।
बैठक की शुरुआत: शोक संवेदना के साथ
बैठक की शुरुआत शोक संवेदना प्रस्ताव के साथ की गई, जिसमें विभिन्न दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि दी गई। इसमें शामिल थे:
- शिबू सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य
- विजय रुपाणी (इंडियन एयरलाइंस हादसे के पीड़ित)
- पद्मश्री डॉ. डाबर, जबलपुर निवासी
- चंद्र कुमार भानोत, मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री
- लक्ष्मी कोल, नगर निगम की पूर्व पार्षद
- पार्षद महेश राजपूत के भाई
इन सभी दिवंगतों के प्रति शोक व्यक्त करने के बाद सदन को 5 मिनट के लिए स्थगित किया गया।
विपक्ष का हंगामा और धरना प्रदर्शन
बैठक के दोबारा शुरू होते ही कांग्रेस के विपक्षी पार्षदों ने अन्य विषयों पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि शहर हित से जुड़े कई जरूरी मुद्दे हैं जिन पर पहले बात होना चाहिए।
विपक्ष की इस मांग पर सत्तापक्ष के पार्षदों ने नारेबाजी शुरू कर दी, और कुछ ने तो सभा कक्ष में धरना भी दे दिया।
अध्यक्ष की अपील – लेकिन नहीं माने विपक्षी पार्षद
नगर निगम अध्यक्ष रिंकू विज ने विपक्ष से बार-बार अपील की कि पहले एम.आई.सी. द्वारा प्रस्तुत 12 प्रस्तावों पर चर्चा की जाए, उसके बाद अन्य विषयों पर भी चर्चा का अवसर मिलेगा।
लेकिन विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहा, जिस कारण बैठक को एक बार फिर 10 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा।
अंत में चर्चा और प्रस्ताव पारित
बैठक के पुनः शुरू होने पर, पक्ष और प्रशासन के प्रयासों से सदन में थोड़ी बहुत व्यवस्था बहाल हुई और एमआईसी द्वारा लाए गए 12 प्रस्तावों पर चर्चा शुरू की गई।
समाचार लिखे जाने तक, 4 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिए गए थे।
निगम की कार्यशैली पर उठे सवाल
हालांकि बैठक में प्रस्तावों का पारित होना प्रशासनिक दृष्टिकोण से जरूरी था, लेकिन विपक्ष का यह तर्क कि शहर के कई ज्वलंत मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है, कहीं न कहीं नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
विपक्षी पार्षदों का कहना था कि जलभराव, सड़क की स्थिति, सफाई व्यवस्था, वार्डों में रोशनी की समस्या और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा को टाला नहीं जाना चाहिए।

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