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Wednesday, July 30, 2025

वार्ड की सीमाओं की जंग में फंसा विकास: सफाई से सड़क निर्माण तक ठप काम, जनता परेशान

 जबलपुर के 30 से अधिक वार्डों में "LOC जैसी सीमाएं" बनी सबसे बड़ी बाधा, पार्षद भी नहीं दिखा रहे लचीलापन

प्रथम टुडे जबलपुर। 

शहर के कई वार्डों में विकास कार्य, सफाई और बुनियादी सुविधाएं वार्ड की सीमाओं के विवाद में उलझ गई हैं। स्थिति ऐसी है कि मानो यह कोई "LOC" हो, जहां एक पार्षद की सीमा खत्म होते ही दूसरे पार्षद का वार्ड शुरू हो जाता है। नतीजा – न सड़क बन रही है, न कचरा उठ रहा है और न ही स्ट्रीट लाइट की दिक्कत दूर हो पा रही है।

सफाई कर्मी कचरे के ढेर को देखकर भी निकल जाते हैं

शहर के कई वार्डों में यह आम नजारा है कि अगर कचरा पड़ोसी वार्ड की सीमा में है, तो सफाई कर्मी उसे अनदेखा कर आगे बढ़ जाते हैं। यही हाल स्ट्रीट लाइट और सड़कों का है। कई जगह सड़कें खस्ताहाल हैं लेकिन वार्ड सीमा दोनों ओर होने से जिम्मेदारी तय नहीं हो पाती। ठेकेदार भी एक ही होते हैं, फिर भी वार्ड की सीमा का हवाला देकर काम नहीं होता।

पार्षदों के बीच आरोप-प्रत्यारोप, जनता भुगत रही खामियाजा

सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई बार पार्षद भी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल देते हैं। जनता जब शिकायत लेकर पहुंचती है, तो जवाब मिलता है – “ये हमारा वार्ड नहीं है, दूसरे पार्षद से बात करो।” बरसात के मौसम में तो परेशानी और बढ़ गई है, क्योंकि कई जगह जलभराव और सड़क धंसने की घटनाएं सामने आईं लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

 2 से 4 वार्डों में यह समस्या नहीं – दो उदाहरण सामने

सकारात्मक उदाहरण: महात्मा गांधी वार्ड और राजेंद्र प्रसाद वार्ड में पार्षदों ने आपसी समझदारी दिखाई है। यहां सफाई, स्ट्रीट लाइट से लेकर सड़क निर्माण तक सभी काम पार्षद मिलकर करवाते हैं।

नकारात्मक उदाहरण: चेरी लाल वार्ड और जयप्रकाश नारायण वार्ड में स्थिति पूरी तरह उलट है। हाल ही में बरसात में सड़क धंसने की समस्या आई लेकिन दोनों पार्षद एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे। नतीजा, जनता आज भी परेशान है।

30-35 वार्डों में यही समस्या, जनता कहां जाए?

शहर के करीब 30 से 35 वार्ड ऐसे हैं, जहां वार्ड सीमाओं के कारण विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। जनता का कहना है कि शिकायत लेकर जाएं तो अधिकारी या पार्षद जवाब देते हैं – “ये हमारे वार्ड का मामला नहीं है।”

क्या समाधान निकलेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निगम प्रशासन को एक स्पष्ट गाइडलाइन जारी करनी चाहिए, जिसमें यह तय हो कि सीमा विवाद के कारण काम नहीं रुकेंगे। वहीं पार्षदों को भी आपसी सामंजस्य से जनता को राहत देनी चाहिए, क्योंकि इस राजनीति का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है

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