एक दौर ऐसा भी था जब पुलिस की बुलेट की आवाज सुनकर बदमाश रास्ता बदल लेते थे
जबलपुर का अपराध जगत जितना पुराना है, उतना ही पुराना इतिहास उन पुलिस अधिकारियों का भी है जिन्होंने अपने साहस, सख्ती और कार्यशैली से अपराधियों के मन में ऐसा खौफ पैदा किया कि उनका नाम सुनते ही बदमाशों के हौसले पस्त हो जाते थे। शहर में आज भी पुराने लोग जब अपराध नियंत्रण की चर्चा करते हैं तो कुछ नाम सम्मान और गर्व के साथ लिए जाते हैं।
आर.सी. तिवारी : जिन्हें कहा जाता था "वन मैन आर्मी"
पूर्व सीएसपी आर.सी. तिवारी का नाम जबलपुर पुलिस के इतिहास में विशेष स्थान रखता है। पुराने पुलिस अधिकारियों और शहरवासियों के अनुसार तिवारी साहब अकेले ही ऐसी परिस्थितियों का सामना कर लेते थे जहां कई पुलिसकर्मी भी जाने से हिचकते थे।
सीओडी बम डिपो में लगी भीषण आग के दौरान उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला था। धुएं और आग के बीच घुसकर लोगों की जान बचाने की घटना आज भी पुलिस विभाग में साहस की मिसाल मानी जाती है।
कहा जाता है कि मदनमहल पहाड़ी क्षेत्र से भटककर आए एक शेर के आबादी वाले इलाके में घुसने पर भी उन्होंने अदम्य साहस दिखाया था। इसी कारण कई लोग उन्हें पुलिस विभाग का "शेर" भी कहते थे।
पुराने अपराधियों के बीच आज भी चर्चा होती है कि जिस क्षेत्र में आर.सी. तिवारी की पदस्थापना होती थी, वहां कई बदमाश अपना ठिकाना बदल देते थे। उनकी बुलेट मोटरसाइकिल की आवाज तक अपराधी पहचान लेते थे।
सतपाल सिंह : नाम सुनते ही हो जाता था सरेंडर
जबलपुर पुलिस के इतिहास में सतपाल सिंह का नाम भी बेहद सम्मान से लिया जाता है। पुराने पुलिसकर्मियों और नागरिकों के अनुसार अपराधियों में उनका ऐसा खौफ था कि यदि किसी फरार आरोपी के परिवार को यह संदेश मिल जाता कि "उसे पेश कर दो", तो कई आरोपी स्वयं थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण कर देते थे।
उनकी कार्यशैली का असर यह था कि जिस थाना क्षेत्र की जिम्मेदारी उनके पास रहती, वहां अपराधियों की गतिविधियां स्वतः कम हो जाती थीं।
ताराचंद दुबे : "जहां रहेगा ताराचंद मुंडा, वहां नहीं रहेगा कोई गुंडा"
ताराचंद दुबे के बारे में एक कहावत लंबे समय तक शहर में प्रचलित रही—
"जहां रहेगा ताराचंद मुंडा, वहां नहीं रहेगा कोई गुंडा।"
अपने सख्त और अनुशासित रवैये के लिए प्रसिद्ध दुबे साहब अपराधियों को स्पष्ट संदेश देते थे कि या तो अपराध छोड़ दो या क्षेत्र छोड़ दो। पुराने लोग बताते हैं कि उनके नाम मात्र से कई बदमाश अपराध की दुनिया से दूरी बना लेते थे।
के.सी. जग्गी : अपराधियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती
के.सी. जग्गी, जिन्हें लोग "बड़ा जग्गी" के नाम से जानते थे, अपने साहस और शारीरिक क्षमता के लिए चर्चित रहे। कहा जाता है कि शहर में जब किसी क्षेत्र में अपराधियों का आतंक बढ़ता था, तो वहां विशेष रूप से उनकी पदस्थापना की जाती थी।
अपराधियों के बीच यह धारणा बन चुकी थी कि यदि जग्गी साहब किसी मामले में लग गए तो बचना मुश्किल है। यही कारण था कि कई बदमाश क्षेत्र छोड़ देते थे या स्वयं पुलिस के सामने समर्पण कर देते थे।
बदलते दौर में भी बने खौफ का पर्याय
समय बदला, पुलिसिंग के तरीके बदले, मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी, लेकिन जबलपुर में कुछ आधुनिक दौर के पुलिस अधिकारियों ने भी अपनी कार्यशैली से अपराधियों में खौफ कायम रखा।
राजेश दंडोतिया : स्मैक माफिया की कमर तोड़ने वाले अधिकारी
वर्तमान में इंदौर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थ राजेश दंडोतिया जब जबलपुर के कोतवाली संभाग में सीएसपी थे, तब उन्होंने मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए।
स्मैक तस्करों के विरुद्ध की गई उनकी कार्रवाइयों की चर्चा आज भी होती है। अपराधियों के बीच उनकी छवि एक सख्त और निष्पक्ष अधिकारी की रही, जिस पर राजनीतिक दबाव भी प्रभाव नहीं डाल पाया।
संजय साहू : बाइक पेट्रोलिंग से बदली तस्वीर
वर्तमान में भोपाल में पदस्थ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय साहू ने जब ओमती संभाग की जिम्मेदारी संभाली, तब उन्होंने अवैध शराब, गांजा और स्मैक कारोबारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की।
रात के समय बाइक पेट्रोलिंग की व्यवस्था को प्रभावी बनाकर उन्होंने पुलिस की मौजूदगी को आमजन तक पहुंचाया, जिसका सकारात्मक असर अपराध नियंत्रण पर देखने को मिला।
अनिल गुप्ता : पैदल गश्त और सख्त कार्रवाई के लिए प्रसिद्ध
कोतवाली थाना प्रभारी के रूप में कार्यकाल के दौरान अनिल गुप्ता ने अपराधियों पर सख्त कार्रवाई कर अलग पहचान बनाई। पैदल गश्त और क्षेत्र में लगातार उपस्थिति ने अपराधियों के मन में पुलिस का भय पैदा किया।
उनकी कार्रवाई कई बार राजनीतिक विवादों का कारण भी बनी, लेकिन तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा ने अपराध नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए उनका समर्थन किया। क्षेत्र के लोगों का मानना था कि उनकी मौजूदगी से कानून व्यवस्था मजबूत रहती थी।
एस.पी. बघेल : ओमती क्षेत्र में अपराधियों के लिए चुनौती
ओमती थाना प्रभारी के रूप में एस.पी. बघेल का नाम भी उन अधिकारियों में शामिल किया जाता है जिन्होंने अपने कार्यकाल में अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया और क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निष्कर्ष
जबलपुर की पुलिसिंग का इतिहास केवल वर्दी और पदों का इतिहास नहीं है, बल्कि उन अधिकारियों की कहानियों का इतिहास भी है जिन्होंने अपने साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा से अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा किया। आज भी शहर के पुराने लोग जब अपराध नियंत्रण के सुनहरे दौर की चर्चा करते हैं तो आर.सी. तिवारी, सतपाल सिंह, ताराचंद दुबे, के.सी. जग्गी, राजेश दंडोतिया, संजय साहू और अनिल गुप्ता जैसे नाम सम्मानपूर्वक याद किए जाते हैं।

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