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Saturday, April 18, 2026

भगवान दास बनेगा 'कुंजी'? आरटीओ फ्लाइंग की अवैध वसूली का बड़ा राज खुलने की आहट

 

जांच एजेंसियों के हाथ लगा तो भोपाल से ग्वालियर तक मच सकता है हड़कंप


जबलपुर | प्रथम टुडे 

परिवहन विभाग की फ्लाइंग टीम में कथित अवैध वसूली और भ्रष्टाचार का मामला अब जबलपुर से लेकर भोपाल और ग्वालियर तक सुर्खियों में है। इस पूरे मामले में सामने आया एक नाम विभागीय हलकों में हलचल पैदा कर रहा है — भगवान दास।

सूत्रों के अनुसार, भगवान दास लंबे समय तक खवासा बॉर्डर पर सक्रिय रहा और कथित तौर पर फ्लाइंग नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा। बताया जा रहा है कि उसने न केवल बैरियर संचालन संभाला, बल्कि विभाग के कई प्रभावशाली अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सीधे काम भी किया। यही कारण है कि उसे इस पूरे नेटवर्क की जमीनी से लेकर ऊपरी स्तर तक की जानकारी होने की बात सामने आ रही है।

बताया जा रहा है कि भगवान दास फ्लाइंग प्रभारी राजेन्द्र साहू और उनके सहयोगी अक्षय पटेल के साथ काम कर रहा था। लेकिन हाल ही में हुई लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद उसे कथित तौर पर अंडरग्राउंड कर दिया गया है।

"अगर पकड़ा गया तो सबके नाम लूंगा" — सूत्र

सूत्रों की मानें तो भगवान दास ने संकेत दिया है कि यदि वह जांच एजेंसियों के हाथ लगता है, तो वह इस पूरे मामले से जुड़े सभी लोगों के नाम उजागर कर सकता है। इस कथित बयान के बाद विभागीय हलकों में बेचैनी बढ़ गई है।

पहले से ही फ्लाइंग प्रभारी राजेन्द्र साहू और अक्षय पटेल आरोपों के घेरे में बताए जा रहे हैं। अब भगवान दास का नाम सामने आने के बाद माना जा रहा है कि मामले में बड़ा खुलासा हो सकता है।

अवैध वसूली नेटवर्क का ‘राजदार’ क्यों माना जा रहा है भगवान दास

सूत्रों के अनुसार, भगवान दास को कथित वसूली के तौर-तरीकों, रकम के बंटवारे और पैसों के ऊपरी स्तर तक पहुंचने की पूरी जानकारी है। कहा जा रहा है कि किन अधिकारियों तक पैसा पहुंचता था और किस स्तर पर किसकी भूमिका थी, इसकी अहम जानकारी भी उसके पास है।

यही वजह है कि जांच एजेंसियों के लिए भगवान दास इस पूरे मामले की अहम कड़ी माना जा रहा है।

जांच एजेंसियों की नजर तेज

लोकायुक्त की हालिया कार्रवाई के बाद अब जांच एजेंसियों की नजर और तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भगवान दास जांच एजेंसियों के हाथ लगेगा? और अगर पकड़ा गया तो क्या वह पूरे सिस्टम का पर्दाफाश करेगा?

यदि ऐसा हुआ, तो जबलपुर से लेकर भोपाल और परिवहन विभाग के मुख्यालय ग्वालियर तक कई अधिकारी बेनकाब हो सकते हैं।

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