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Sunday, April 12, 2026

जबलपुर में बढ़ते अपराधों पर लगाम के लिए जिला प्रशासन की भूमिका अहम

 पुलिस कार्रवाई के बाद भी ढीली प्रतिबंधात्मक कार्रवाई से नहीं बन पा रहा असर



जबलपुर
शहर में सट्टा, जुआ और अवैध शराब जैसे अपराधों पर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। आए दिन विभिन्न थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर आरोपियों को पकड़ा जा रहा है और उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद अपराधों में अपेक्षित कमी दिखाई नहीं दे रही है। इसका बड़ा कारण पुलिस कार्रवाई के बाद प्रतिबंधात्मक धाराओं में जिला प्रशासन स्तर पर प्रभावी कार्रवाई का अभाव माना जा रहा है।

पुलिस की कार्रवाई, प्रशासन की ढिलाई

पुलिस द्वारा सट्टा, जुआ और अवैध शराब जैसे मामलों में आरोपियों को पकड़कर धारा 151, 107, 116 सहित अन्य प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई की जाती है। इसके बाद आरोपियों को एसडीएम या तहसीलदार के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, जहां उनसे शांति बनाए रखने के लिए बांड भरवाया जाता है।

लेकिन कई मामलों में यह कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है। आरोपी मामूली बांड भरकर बाहर आ जाते हैं और कुछ ही समय बाद दोबारा उसी गतिविधि में सक्रिय हो जाते हैं। इससे अपराधियों में कानून का भय कम होता जा रहा है।

जुर्माना लगाने से मिल सकता है प्रभावी परिणाम

प्रतिबंधात्मक धाराओं में यह स्पष्ट प्रावधान है कि यदि आरोपी दोबारा अपराध करता है या शांति भंग करता है, तो प्रशासन उस पर जुर्माना लगा सकता है या बांड की राशि जब्त कर सकता है। यदि इस प्रावधान का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो बार-बार अपराध करने वालों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बार-बार पकड़े जाने वाले आरोपियों पर भारी जुर्माना लगाया जाए, तो अपराधियों पर आर्थिक दबाव बनेगा और वे इस तरह के अपराधों से दूर रहेंगे।

सरकार को मिल सकता है राजस्व

इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत लगाए गए जुर्माने से सरकार को राजस्व भी प्राप्त हो सकता है। यदि जिला प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से कदम उठाए, तो अपराधों पर अंकुश लगाने के साथ-साथ शासन को आर्थिक लाभ भी मिल सकता है।

लेकिन वर्तमान में इस दिशा में अपेक्षित पहल कम ही देखने को मिल रही है। अधिकतर मामलों में केवल बांड भरवाकर कार्रवाई पूरी मान ली जाती है।

जिला प्रशासन की सख्ती जरूरी

यदि एसडीएम, तहसीलदार और अन्य राजस्व अधिकारी प्रतिबंधात्मक धाराओं में सख्ती बरतें और बार-बार अपराध करने वालों पर जुर्माना लगाएं, तो निश्चित रूप से सट्टा, जुआ और अवैध शराब जैसे अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

पुलिस और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी है। पुलिस द्वारा चिन्हित अपराधियों की सूची बनाकर उनके खिलाफ लगातार प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाए, तो स्थिति में सुधार संभव है।

नागरिकों की भी अपेक्षा

शहर के नागरिकों का भी मानना है कि पुलिस कार्रवाई के बाद यदि प्रशासन सख्ती बरते, तो अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। केवल औपचारिक कार्रवाई से अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं।

अब जरूरत है कि जिला प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से पहल करे और प्रतिबंधात्मक धाराओं का प्रभावी उपयोग कर शहर में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाए।

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