विदाई में मिला 'बेशर्म के फूलों का गुलदस्ता': ट्राइबल कमिश्नर की विदाई का 30 तारीख का वीडियो वायरल; छात्रों ने कहा- "साहब! यह आपके कर्मों का तोहफा है" - Pratham Today, Sach Ki Baat SabKe Saath -->

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Friday, June 5, 2026

विदाई में मिला 'बेशर्म के फूलों का गुलदस्ता': ट्राइबल कमिश्नर की विदाई का 30 तारीख का वीडियो वायरल; छात्रों ने कहा- "साहब! यह आपके कर्मों का तोहफा है"

 

जबलपुर।

सरकारी विभागों में रिटायरमेंट के दिन अमूमन सिल्क के शॉल, गेंदे के चमचमाते हार और 'आप बहुत याद आएंगे' वाले कसीदे पढ़े जाते हैं। लेकिन जबलपुर के अनुसूचित जनजाति विकास विभाग (ट्राइबल डिपार्टमेंट) में 30 तारीख को विदाई का जो नजारा दिखा, उसने इतिहास बदल दिया। सहायक आयुक्त सी.के. दुबे को विदाई में गुलाब या गेंदा नहीं, बल्कि 'बेशर्म के फूलों का गुलदस्ता' भेंट किया गया। अब इस पूरी घटना का एक सनसनीखेज वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासनिक महकमे से लेकर भोपाल तक के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। यह विदाई नहीं, बल्कि छात्रों द्वारा एक अफसर की कार्यशैली का सरेबाजार निकाला गया 'लाइव पोस्टमार्टम' था।

​केबिन में घुसे छात्र, हाथ में था 'बेशर्म' का गुलदस्ता: वीडियो में कैद हुआ लाइव गुस्सा

​वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे सेवानिवृत्ति के अंतिम दिन (30 तारीख को) छात्र नेता और हॉस्टलों के छात्र हाथ में बकायदा सजाया हुआ 'बेशर्म के पौधों और फूलों का गुलदस्ता' लेकर साहब के केबिन में दाखिल होते हैं। वीडियो में छात्रों का आक्रोश सातवें आसमान पर है, जो कैमरे के सामने सीधे साहब को उनका रिपोर्ट कार्ड थमा रहे हैं।

​"साहब, यह बेशर्म का गुलदस्ता हमारी तरफ से आपकी उस कार्यशैली को आखिरी सलाम है, जिसने सालों तक आदिवासी छात्रों को सिर्फ झूठे आश्वासनों की 'लॉलीपॉप' थमाई।"

वायरल वीडियो में गूंजता छात्र नेताओं का तीखा बयान


​छात्रों ने वीडियो में साफ कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि उस बहरी प्रशासनिक व्यवस्था से है, जिसने हॉस्टलों की बदहाली, टूटी दीवारें, पीने के साफ पानी की किल्लत और छात्रवृत्ति की कछुआ चाल पर सालों तक आंखें मूंद रखी थीं। छात्र चिल्लाते रहे, लेकिन साहब के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। इसीलिए 30 तारीख को विदाई का ऐसा 'लाइव चैप्टर' लिखा गया, जिसे विभाग सदियों तक नहीं भूलेगा।

​"भगवान बचाए ऐसे रहमदिल हुक्मरानों से!" — सोशल मीडिया पर उड़ीं धज्जियां

​30 तारीख की इस घटना का वीडियो जैसे ही फेसबुक, व्हाट्सएप और एक्स (ट्विटर) पर आया, व्यूज और कमेंट्स की बाढ़ आ गई। अनुसूचित जाति-जनजाति छात्र संघ के अध्यक्ष सोनेलाल उरेती का वह तीखा प्रहार भी वीडियो में साफ दिख रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि जब जिम्मेदार कुर्सियां अपनी संवेदनशीलता बेच खाती हैं, तब विरोध भी प्रतीकात्मक नहीं रहता, बल्कि 'बेशर्म' बन जाता है। छात्रों ने कैमरे के सामने दोटूक कहा— "भगवान न करे कि जबलपुर ट्राइबल विभाग की दहलीज पर दोबारा कोई ऐसा मसीहा कदम रखे, जिसे छात्रों की चीखें सिर्फ फाइलों का बोझ लगती हों।"

विदाई तो हो गई, लेकिन 'गुलदस्ता' छोड़ गया गहरे घाव!

​सी.के. दुबे 30 तारीख को सरकारी रिकॉर्ड में रिटायर होकर अपने घर तो चले गए, लेकिन इस 'बेशर्म के गुलदस्ते' और वायरल वीडियो ने उनकी जिंदगी भर की कमाई (सेवानिवृत्ति के सुकून) को पूरी तरह से किरकिरा कर दिया है। विभागीय गलियारों में अब इस बात की चर्चा रत्ती भर भी नहीं है कि साहब ने कितने साल नौकरी की; बल्कि लोग मोबाइल स्क्रीन पर चल रहे इस वीडियो को फॉरवर्ड कर चटकारे ले रहे हैं कि 'विदाई हो तो ऐसी हो!' इस अनोखे और तीखे विरोध ने जबलपुर के प्रशासनिक इतिहास में एक ऐसा पन्ना जोड़ दिया है, जहां विदाई के फूलों ने सम्मान देने के बजाय पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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